अमृतसर: भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर के कार्यभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद, सिख संगठन ‘दल खालसा‘ ने उन्हें एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में आर्थिक और व्यापारिक हितों से ऊपर उठकर दक्षिण एशिया में शांति बहाली और संघर्षों के निवारण की मांग की गई है।
दल खालसा के नेता कंवरपाल सिंह ने अमेरिकी राजदूत और दक्षिण व मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत को संबोधित करते हुए कहा कि यह तत्काल क्षेत्रीय चिंता का विषय है और पंजाब के लोगों द्वारा सामना की जा रही चुनौतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने पत्र में लिखा, “व्यापार और प्रौद्योगिकी साझेदारी महत्वपूर्ण है, और भारत निस्संदेह एक विशाल बाजार है। लेकिन, मुझे यह चिंता भी दर्ज करानी चाहिए कि किसी भी कॉरिडोर, किसी भी सेमीकंडक्टर चेन या किसी भी बाज़ार तक पहुंच को—मानवीय मूल्यों, गरिमा और मौलिक अधिकारों व स्वतंत्रता से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उन दावों का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्होंने “व्यापार और टैरिफ” का उपयोग करके दो परमाणु शक्तियों (भारत और पाकिस्तान) के बीच युद्ध को रोकने की बात कही थी, दल खालसा ने वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक से उन प्रयासों को और मजबूत करने का आग्रह किया, ताकि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति स्थापित हो सके।
दल खालसा के नेताओं ने पत्र में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सिखों के लिए ‘आत्म-निर्णय’ के अधिकार के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने बताया कि इस लोकतांत्रिक संघर्ष के दौरान उन्हें लगातार सरकारी बाधाओं और भारी दबाव का सामना करना पड़ता है।
पत्र में यह दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत की दक्षिणपंथी सरकार के शासन में पंजाब लगातार हमलों और भेदभाव का सामना कर रहा है। संगठन ने न केवल पंजाब, बल्कि कश्मीर और नागालैंड के लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार को भी उठाते हुए इसे न्याय के स्थापित मानकों के खिलाफ करार दिया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए, दल खालसा ने भारत के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के हालिया बयान—”ऑपरेशन सिंदूर जारी है”—का विशेष उल्लेख किया। संगठन ने कहा कि इस तरह के बयान भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की आशंकाओं को और प्रबल करते हैं।
दल खालसा ने आशंका जताई है कि दिल्ली सरकार की मंशा पंजाब को एक बार फिर युद्ध का अखाड़ा बनाने की हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह पूरे क्षेत्र, और विशेषकर पंजाब के लोगों के लिए विनाशकारी साबित होगा।
दल खालसा के पत्र में कहा गया है कि अमेरिका के पास इस क्षेत्र—भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान—का गहरा अनुभव है। अमेरिका इस बात से भी भली-भांति परिचित है कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, जिसमें चीन की बढ़ती रुचि और प्रभाव भी शामिल है, स्थानीय विवादों को और जटिल बना देती है। ऐसे माहौल में पंजाब की अनदेखी नहीं की जा सकती और न ही उसे व्यापार की वेदी पर बलिदान किया जा सकता है।
संगठन ने जोर देकर कहा कि दक्षिण एशिया में स्थिरता आर्थिक कूटनीति का कोई गौण मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वह अनिवार्य शर्त है जो हर आर्थिक वादे को विश्वसनीय बनाती है।
सिख संस्था ने यह भी कहा कि अमेरिका को इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि युद्ध भड़काने वाली बयानबाजी और क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे विवाद बनी-बनाई बात को बिगाड़ सकते हैं।
