निखिल गुप्ता के इकबालिया बयान से ‘रॉ’ की बड़ी साजिश बेनकाब: पंच प्रधानी जत्था

अमेरिका में निखिल गुप्ता के खुलासे के बाद पंच प्रधानी जत्थे ने चेतावनी दी है कि भारतीय खुफिया एजेंसियां पंजाब में अस्थिरता पैदा कर रही हैं। जत्थे का अंदेशा है कि विदेशों की तर्ज पर अब पंजाब में भी सिख हस्तियों और किसान नेताओं को भाड़े के हत्यारों के जरिए निशाना बनाने की साजिश रची जा सकती है।

Panch Pardhani Jatha

अमृतसर: पंच प्रधानी जत्थे द्वारा आज जारी एक बयान में कहा गया है कि अमेरिका में गुरपतवंत सिंह पन्नू को भाड़े के हत्यारों के जरिए मरवाने की साजिश में भारतीय एजेंसियों के गुर्गे निखिल गुप्ता द्वारा न्यूयॉर्क की अदालत में दिए गए इकबालिया बयान ने भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ और अधिकारी विकास यादव की भूमिका को बेनकाब कर दिया है। यह बयान भाई दलजीत सिंह, भाई नारायण सिंह, भाई सतनाम सिंह खंडा, भाई सतनाम सिंह झंजियां, भाई हरदीप सिंह मेहराज और भाई भूपिंदर सिंह भलवान सहित सिख संघर्ष से जुड़ीं 11 शख्सियतों की भागीदारी वाले पंच प्रधानी जत्थे के प्रवक्ता परमजीत सिंह गाज़ी ने जारी किया है।

नेताओं ने कहा कि इससे मोदी सरकार की सिखों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दमन की नीति का पर्दाफाश हुआ है। उन्होंने अमेरिका में बसने वाले सिखों से अपील की कि वे वहां की सरकार, लोगों और मीडिया के जरिए असली साजिशकर्ताओं की कानूनी जवाबदेही सुनिश्चित करें और इस मसले को अमेरिका-भारत व्यापारिक समझौतों के तले दबने न दें। पंजाब के हालातों पर विशेष जोर देते हुए नेताओं ने कहा कि विदेशों वाले दमन चक्र की तर्ज पर पंजाब में भी फिरौती, हत्याओं और हिंसक वारदातों के जरिए अस्थिरता और अफरा-तफरी का माहौल बनाया जा रहा है, जिसके पीछे भारतीय एजेंसियों और गृह मंत्रालय का सीधा हाथ है। एजेंसियों ने पहले सिखों के पुराने मसले उभार कर आपसी टकराव करवाने की कोशिश की, लेकिन समझदार सिख पक्षों के संयम ने यह चाल नाकाम कर दी। हालांकि, अभी भी कुछ लोग अपने साक्षात्कारों के जरिए बार-बार ये मसले उभार कर सिखों के लिए घातक सरकारी विमर्श गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।

बयान में आगे कहा गया है कि पंजाब में गैंगवार की आड़ में सिख नेताओं को निशाना बनाने की कोशिशें हुईं, लेकिन गैंगस्टरों ने भी सीधे तौर पर सरकार की कठपुतली बनने से इनकार कर दिया। अब भारत सरकार विदेशों की तरह पंजाब में भी संघर्षशील सिख शख्सियतों, किसान नेताओं और पंजाब के हितैषियों को पंजाब के बाहर के भाड़े के हत्यारों के जरिए खत्म करवाने की साजिश रच सकती है। नेताओं ने याद दिलाया कि जनवरी 2025 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के अधिकारियों ने भी सिख कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों के कारण पंजाब में पैदा हो रहे खतरनाक हालातों पर चिंता जताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बयान किसी डर के कारण या सुरक्षा मांगने के लिए जारी नहीं किया गया है, बल्कि यह दुनिया के सामने भारत के लोकतंत्र के पर्दे के पीछे चल रही आतंकवादी दमन की नीति को उजागर करने का एक फर्ज है।

बदल रहे भू-राजनीतिक हालातों में पंजाब की अहमियत बहुत बढ़ गई है, इसीलिए सरकार सिखों को बदनाम और कमजोर करना चाहती है। नेताओं ने समूचे सिख जगत और खालसा पंथ से अपील की कि मतभेदों को सार्वजनिक तौर पर उछालने की बजाय आपसी संवाद के जरिए हल किया जाए। उन्होंने दोहराया कि सिखों के लिए साझा नेतृत्व और मंच बनाने के प्रयास जारी हैं और वे 26 जनवरी 2026 को श्री अकाल तख्त साहिब में इस संबंध में की गई घोषणाओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

Panch Pardhani Jatha
पंच प्रधानी जत्था