लुधियाना: फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में अचानक बढ़ी गर्मी ने गेहूं की फसल की पैदावार के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस महीने तापमान सामान्य से 5 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है। यह बढ़ा हुआ तापमान गेहूं में दाना बनने के अहम चरण को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में बारिश होने की संभावना भी काफी कम है।
इसके चलते उत्तर भारत में गेहूं की पैदावार 10 से 20 प्रतिशत तक घटने के आसार बन गए हैं। इस भीषण गर्मी का असर पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी पड़ने की संभावना है। अकेले पंजाब में इस बार गेहूं की पैदावार 12 से 20 लाख टन तक कम हो सकती है। बठिंडा, मोगा, संगरूर और लुधियाना जैसे जिलों में करीब 50 हजार एकड़ से अधिक फसल प्रभावित होने की आशंका है।
नुकसान का व्यापक असर
पंजाब में गेहूं की फसल इस समय दाना भरने और बालियों के विकास के महत्वपूर्ण चरण में है। तापमान में अचानक वृद्धि के कारण गेहूं के पौधे सूख रहे हैं और दाने का वजन हल्का हो रहा है। यह नुकसान 2022 की तेज गर्मी (जब पैदावार 5 से 10% घटी थी) की तुलना में कहीं अधिक हो सकता है।
खन्ना के नजदीकी गांवों में फसल पीली पड़ रही है और दाने छोटे हो रहे हैं। किसान दलजीत सिंह नौलड़ी और अमृतपाल सिंह बेनीपाल ने बताया कि अचानक बढ़ते तापमान के कारण गेहूं के पत्तों और बालियों का रंग पीला पड़ रहा है, जिससे उपज का घटना तय है। गर्मी के कारण गेहूं का दाना सिकुड़ जाएगा। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यह नुकसान न केवल पैदावार को घटाएगा, बल्कि अनाज की गुणवत्ता को भी प्रभावित करेगा। इसका सबसे बड़ा नुकसान गेहूं का बीज तैयार करने वाले किसानों को होगा। असिंचित (बारानी) खेतों में यह नुकसान और भी अधिक है, जहां 30 प्रतिशत तक फसल सूखे की चपेट में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह गर्मी 15 दिन और जारी रही, तो नुकसान 25 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
किसानों की चिंताएं और आर्थिक प्रभाव
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल और हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि अचानक बढ़ी गर्मी ने किसानों को मामूली नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा झटका दिया है। यदि एक एकड़ में पैदावार 5 से 7 क्विंटल भी कम होती है, तो किसान की आय में 20 से 25 हजार रुपये प्रति एकड़ का नुकसान होगा। राजेवाल ने तो यहां तक दावा किया है कि गेहूं की उपज 40 प्रतिशत तक घट सकती है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में तापमान 25 से 30 डिग्री रहने से दाने का वजन 10 प्रतिशत तक घट गया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चेतावनी दी है कि यह गर्मी विश्व स्तर पर खाद्य पदार्थों की महंगाई को बढ़ा सकती है। किसान नेताओं ने सरकार से मांग की है कि फसल के नुकसान का सर्वेक्षण किया जाए और किसानों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाए।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
पंजाब कृषि विभाग ने किसानों को तुरंत बचाव कदम उठाने की सलाह दी है। मुख्य सिफारिश यह है कि फसल पर हर 4-5 दिन बाद 2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट (पोटाश) का स्प्रे या नाइट्रोजन से भरपूर यूरिया के 2 प्रतिशत घोल का छिड़काव किया जाए। साथ ही, हल्की सिंचाई करके मिट्टी में 40-50 प्रतिशत नमी बनाए रखी जाए। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनुराग कुमार ने कहा कि फसल को उचित पोषण देने से इस नुकसान को 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
हरियाणा, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भी खतरा
पंजाब के अलावा, हरियाणा के कुरुक्षेत्र और कैथल जैसे जिलों में भी तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया है। वहां भी 12-18 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान है। वहीं, मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल जैसे क्षेत्रों में भी गेहूं की फसल गर्मी से प्रभावित हो रही है।
केंद्र सरकार की भूमिका और नीतियां
केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य 3.3 करोड़ (3 करोड़ 30 लाख) टन रखा है, जो अब गर्मी से होने वाले नुकसान के कारण पूरा होता मुश्किल लग रहा है। 2022 की तरह ही एक बार फिर से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने किसानों को ‘राष्ट्रीय फसल बीमा योजना’ के तहत अपनी क्षतिग्रस्त फसलों के लिए बीमा क्लेम दर्ज करने की सलाह दी है।
गौरतलब है कि इस गर्मी के कारण कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग भी 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। सरकार को अब दीर्घकालिक रणनीतियों पर ध्यान देना चाहिए और मौसम के बदलावों को सहने वाली (Climate-resilient) गेहूं की उन्नत किस्मों को विकसित करने पर जोर देना चाहिए।
