मिडल ईस्ट संकट: ईरान-इजरायल जंग से इंडिया की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका, पंजाब और हरियाणा पर सबसे ज्यादा असर

मद्ध पूर्व में जारी अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और समुद्री रास्तों में रुकावट से इंडिया को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसका सीधा असर पंजाब के बासमती निर्यात, खाड़ी देशों से आने वाले विदेशी धन और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है।

Impact of US-Iran war on Indian Economy ईरान-इजरायल युद्ध का इंडिया पर असर

नई दिल्ली/चंडीगढ़: मद्ध पूर्व (Middle East) में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने इंडिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के कारण इंडिया के पंजाब, हरियाणा और केरल जैसे राज्य सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा के बासमती चावल के निर्यात और खाड़ी देशों से आने वाले विदेशी धन पर इसका गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

विदेशी मुद्रा और रोजगार पर मंडराते बादल

इंडिया को मिलने वाले कुल वैश्विक प्रेषण (Remittances) का लगभग 38 से 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले खाड़ी देशों से आता है। इन देशों में लगभग 90 लाख इंडियन कार्यरत हैं, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में 40 लाख, सऊदी अरब में 30 लाख और कतर में 8 लाख इंडियन शामिल हैं।

यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो अस्थिरता, हवाई मार्गों की बंदी और कामकाज ठप होने से इंडिया आने वाले विदेशी धन में भारी गिरावट आ सकती है। खाड़ी देशों में रहने वाले अधिकतर पंजाबी और सिख समुदाय के लोग निर्माण, आतिथ्य (Hospitality), सर्विस, रिटेल और तेल क्षेत्रों में काम करते हैं, जो युद्ध से सबसे अधिक प्रभावित हैं। कई लोग काम न मिलने और जान के खतरे के कारण वापस आने की मदद मांग रहे हैं, हालांकि इंडिया की सरकार उनकी सहायता कर रही है।

धार्मिक स्थलों और सुरक्षा की स्थिति

खाड़ी देशों में स्थित गुरुद्वारे पंजाबी और सिख समुदाय के लिए बड़ा सहारा रहे हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति ने वहां भी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। दुबई में सुरक्षा और भीड़ से बचाव के लिए पहली बार गुरुद्वारे के कामकाज पर प्रभाव पड़ा है। वहीं, ईरान की राजधानी तेहरान में 1941 से स्थापित सिंह सभा गुरुद्वारा, जिसमें लगभग 100 लोग हैं, वर्तमान में पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है।

बासमती निर्यात को बड़ा झटका

इंडिया ने वर्ष 2024-25 में लगभग 60.65 लाख टन बासमती चावल निर्यात किया था, जिसकी कुल कीमत 50,312 करोड़ रुपये थी। इंडिया अपने कुल बासमती निर्यात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब, ईरान, इराक और यूएई जैसे देशों को भेजता है।

ईरान बासमती का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है। अब ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के माध्यम से समुद्री आवाजाही प्रभावित होने से करीब 4 लाख टन बासमती की सप्लाई रुक गई है। नए ऑर्डर रद्द हो रहे हैं और कीमतों में 400 से 800 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है। चूंकि इंडिया से निर्यात होने वाले बासमती चावल में पंजाब और हरियाणा की हिस्सेदारी 75% है, इसलिए यहां के किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान हो सकता है।

हवाई किराए में 150% तक की भारी बढ़ोतरी

युद्ध के कारण मिडल ईस्ट के हवाई मार्ग बंद या सीमित होने से यूरोप और अमेरिकी देशों को जाने वाली उड़ानों पर बुरा असर पड़ा है। सर्दियों की छुट्टियों में पंजाब आए हजारों प्रवासी उड़ानें रद्द होने से परेशान हैं। वर्तमान में रोजाना 700 से अधिक उड़ानें रद्द हो रही हैं। हालात यह हैं कि इंडिया-अमेरिका और कनाडा रूट पर टिकटों की कीमतें 100 से 150 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। विशेष रूप से ग्रीन कार्ड और वर्क वीजा धारक पंजाबी अपनी नौकरी और इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर बेहद चिंतित हैं।

खेती और महंगाई पर असर

खाड़ी देशों से यूरिया और गैस की आपूर्ति बाधित होने से इंडिया और दुनिया भर में उर्वरक उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इससे खाद की कीमतें बढ़ने का अंदेशा है, जिसका सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा के किसानों पर पड़ेगा। यदि जंग लंबी चली, तो महंगाई और आर्थिक मंदी और गहरा सकती है।