अमृतसर: पंजाब में 1980 और 90 के दशक के दौरान मानवाधिकारों के हनन और ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ का सच उजागर करने वाले भाई जसवंत सिंह खालड़ा के कार्य को पिछले दो दशकों से आगे बढ़ा रही संस्था पीपल्स डॉक्यूमेंटेशन एंड एडवोकेसी प्रोजेक्ट (PDAP) ने आज श्री अमृतसर में एक पत्रकार वार्ता की।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीडीएपी की ओर से बैरिस्टर सतनाम सिंह बैंस, एडवोकेट जगजीत सिंह बाजवा और एडवोकेट बलजिंदर सिंह बाजवा ने पिछले 20 सालों में भाई जसवंत सिंह खालड़ा के काम की पैरवी करने और उसे आगे बढ़ाने के प्रयासों की विस्तृत जानकारी साझा की।
श्री अकाल तख्त साहिब को लिखा पत्र
प्रेस वार्ता के दौरान, PDAP ने श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज के नाम लिखा गया एक पत्र जारी किया। इस पत्र का मुख्य विषय है: “सीबीआई अदालतों द्वारा दोषी पुलिस अधिकारियों को सजा दिलाने वाले पीड़ित परिवारों को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) द्वारा मुआवजा देने और भाई जसवंत सिंह खालड़ा जी के मामले में दोहरी नीति से बचने का अनुरोध।”

पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि 1984 से 1995 तक पंजाब में हजारों सिख युवाओं को फर्जी पुलिस एनकाउंटर में मार दिया गया और उनका गुप्त रूप से अंतिम संस्कार कर दिया गया। इन घटनाओं का सच सामने लाने वाले मानवाधिकार रक्षक भाई जसवंत सिंह खालड़ा को भी पंजाब पुलिस ने गैर-कानूनी रूप से अगवा कर लापता कर दिया और बाद में उनकी हत्या कर दी।
श्री अकाल तख्त साहिब से 3 प्रमुख मांगें:
पीडीएपी ने अपने पत्र में कार्यकारी जत्थेदार से शिरोमणि कमेटी (SGPC) को निम्नलिखित आदेश देने की अपील की है:
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आर्थिक मुआवजा: सीबीआई अदालतों से न्याय प्राप्त करने वाले सभी पीड़ित परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
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रोजगार में प्राथमिकता: जिन पीड़ित परिवारों के साबत-सूरत (पूर्ण सिख स्वरूप वाले) बच्चे शिरोमणि कमेटी में सेवा के योग्य हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर नौकरी दी जाए।
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एडवोकेट सतनाम सिंह कलेर पर कार्रवाई: जिन एडवोकेट सतनाम सिंह कलेर ने सीबीआई मामलों में दोषी पुलिस अधिकारियों की पैरवी की और जिन्हें एसजीपीसी की सिफारिश पर गुरुद्वारा ज्यूडिशियल कमीशन का चेयरमैन नियुक्त किया गया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। (चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित परिवार एसजीपीसी प्रधान से जवाबदेही मांगेंगे)।
भाई खालड़ा के अधूरे कार्य को कैसे आगे बढ़ाया गया?
बैरिस्टर सतनाम सिंह ने बताया कि जो संघर्ष भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने 2,097 अज्ञात शवों की पहचान से शुरू किया था, वह 30 वर्षों के निरंतर संघर्ष के बाद आज लगभग 9,000 लापता लोगों की पहचान का मार्ग प्रशस्त कर चुका है।

मुख्य उपलब्धियां और तथ्य:
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दस्तावेजों की पड़ताल: सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और सीबीआई अदालतों के लगभग 2,00,000 सरकारी रिकॉर्ड्स, एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों की बारीकी से जांच की गई।
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दोषियों को सजा: पीडीएपी के प्रयासों से 2016 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक हटी। अब तक 115 दोषी पुलिसकर्मियों को हत्या, अपहरण और अन्य गंभीर अपराधों के लिए उम्रकैद सहित सख्त सजाएं मिल चुकी हैं।
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हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL): 2019 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 8,257 लापता व्यक्तियों का विवरण पेश करते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई थी। अब यह आंकड़ा 9,000 तक पहुंच गया है।
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25,000 मामलों की तलाश: पीडीएपी अपने सीमित संसाधनों के बावजूद ‘लापता पंजाब’ मुहिम के तहत 25,000 मामलों का पूरा विवरण एकत्र करने का प्रयास कर रही है।

पंजाब सरकार से मुख्य मांगें
संस्था ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार से भी कड़ी मांगें रखी हैं:
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स्वतंत्र न्यायिक आयोग: पूरे पंजाब में लापता किए गए लोगों और गैर-न्यायिक हत्याओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग का गठन हो।
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दोषियों पर कार्रवाई: कांग्रेस के समय हुए कत्लेआम और अकाली दल द्वारा बचाए गए दोषियों को कटघरे में खड़ा किया जाए और पीड़ित परिवारों का पुनर्वास हो।
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गुप्त फंड पर रोक: पिछली सरकारों द्वारा दोषी पुलिसकर्मियों की कानूनी मदद के लिए बनाए गए ‘लिटिगेशन सेल’ और ‘गुप्त फंड’ को तुरंत बंद किया जाए।
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मुख्यमंत्री निभाएं वादा: सीएम भगवंत मान सांसद रहते हुए संसद में फर्जी पुलिस एनकाउंटर पर दिए गए अपने बयानों पर खरे उतरें और दोषियों की पहचान में मदद करें।
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PIL में सहयोग: पंजाब सरकार हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में सही जवाब देकर जांच में सहयोग करे, न कि पुलिस का बचाव करे।
