चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 6 जुलाई 2026 को भाई जगतार सिंह हवारा द्वारा दायर पैरोल अर्जी पर हो रही प्रशासनिक देरी के मामले में हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं।
भाई जगतार सिंह हवारा ने अपनी 81 वर्षीय माता की देखभाल के लिए चार सप्ताह की अस्थायी रिहाई (पैरोल) के लिए याचिका दायर की थी। अर्जी में बताया गया है कि उनकी माता बढ़ती उम्र के कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही हैं।
लंबी कैद और पैरोल की मांग
भाई जगतार सिंह हवारा को बेअंत सिंह सोध कांड मामले में सी.बी.आई. की अदालत द्वारा पहले मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था। वह करीब 29 वर्षों से जेल में हैं और इस दौरान उन्हें कभी भी पैरोल या अस्थायी रिहाई नहीं मिली।
मौजूदा मामला उस समय अदालत के सामने पहुंचा जब केंद्रीय जेल नंबर 15, मंडोली, नई दिल्ली के अधीक्षक द्वारा उनकी पैरोल अर्जी पंजाब सरकार को भेज दी गई थी।

भाई जगतार सिंह हवारा के वकील ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि इस मामले में सिफारिशें देने के लिए सक्षम प्राधिकरण पंजाब सरकार नहीं, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के गृह सचिव हैं, क्योंकि जिस मामले में सजा हुई थी वह चंडीगढ़ के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है।
अधिकार क्षेत्र संबंधी देरी दूर करने के लिए हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस सुखविंदर कौर की पीठ ने प्रशासनिक उलझन को दूर करते हुए पैरोल अर्जी पर कार्रवाई के लिए स्पष्ट समयबद्ध प्रक्रिया तय की।
अदालत ने सबसे पहले केंद्रीय जेल नंबर 15, मंडोली के अधीक्षक को आदेश दिया कि भाई हवारा की पैरोल अर्जी एक सप्ताह के भीतर गृह सचिव, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को भेजी जाए।
इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि अर्जी मिलने के बाद चार सप्ताह के भीतर अपनी टिप्पणियां और सिफारिशें तैयार करके वापस केंद्रीय जेल नंबर 15, मंडोली के अधीक्षक को भेजी जाएं।
अदालत ने आगे कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन से टिप्पणियां और सिफारिशें मिलने के बाद जेल अधीक्षक दो सप्ताह के भीतर पैरोल अर्जी पर अंतिम निर्णय लें।
समय सीमा का पालन सुनिश्चित करने के आदेश
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में विशेष रूप से जोर दिया कि जिन भी अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट या टिप्पणियां भेजी जानी हैं, वे अदालत द्वारा निर्धारित समय सीमाओं का विशेष ध्यान रखें, ताकि मामले में और देरी न हो।
