अडाणी समूह पर वित्तीय अनियमितताओं के नए आरोप: विदेशी बैंक के दस्तावेजों से हुआ बड़ा खुलासा

अडाणी समूह एक बार फिर विवादों में है। ‘फाइनांशियल टाइम्स’ और ‘ओसीसीआरपी’ की ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इटली के एक बैंक ने अडाणी के सहयोगियों के खातों में संदिग्ध गतिविधियां पाई थीं। साथ ही, अमेरिकी वित्त विभाग भी ईरान प्रतिबंधों को लेकर समूह की जांच कर रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

New Financial Manipulation Allegations Against Adani Group Leaked Bank Documents Spark Fresh Controversy

नई दिल्ली: भारतीय उद्योग जगत के प्रमुख अडाणी समूह को लेकर एक बार फिर गंभीर वित्तीय सवाल खड़े हो गए हैं। लंदन स्थित समाचार पत्र ‘फाइनांशियल टाइम्स’ और खोजी पत्रकारों के संगठन ‘ओ.सी.सी.आर.पी’ द्वारा 17-18 फरवरी 2026 को प्रकाशित एक संयुक्त प्रतिवेदन (रिपोर्ट) में दावा किया गया है कि इटली के सबसे बड़े बैंक ने अडाणी समूह से जुड़े संदिग्ध विदेशी लेनदेन को चिह्नित किया था।

Gautam Adani
गौतम अडाणी

विदेशी बैंक की जांच में सामने आए तथ्य ‘फाइनांशियल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, इटली के प्रमुख बैंक ‘इंटेसा सैनपाओलो’ ने वर्ष 2023 में एक आंतरिक जांच की थी। इस जांच में बैंक ने पाया कि विनोद अडाणी (गौतम अडाणी के भाई) के दो करीबी सहयोगियों—चांग चुंग-लिंग और नासिर अली शाबान अहली—के खातों में संदिग्ध गतिविधियां हो रही थीं।

intensa sanpaolo headquarters in italy
प्रमुख बैंक ‘इंटेसा सैनपाओलो’

रिपोर्ट में बैंक के आंतरिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा गया है कि चांग और अहली के पास क्रमशः 1 अरब डॉलर और 2 अरब डॉलर की राशि उन विदेशी निवेश फंडों में थी, जिनका पैसा कथित तौर पर अडाणी समूह की कंपनियों में लगा था। गौरतलब है कि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के ठीक एक दिन बाद ही बैंक ने इन खातों पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह खुलासा इस बात की ओर संकेत करता है कि इन विदेशी संस्थाओं का उपयोग अडाणी समूह के शेयरों में हेराफेरी करने और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने के लिए किया गया हो सकता है।

अमेरिकी वित्त विभाग की जांच और ईरान प्रतिबंध इससे पूर्व, 10 फरवरी 2026 को अडाणी एंटरप्राइजेज ने भारतीय शेयर बाजारों को सूचित किया था कि उन्हें अमेरिकी वित्त विभाग से नोटिस प्राप्त हुआ है। ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जांच ईरान के साथ पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार को लेकर है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन हो सकता है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिकी अधिकारियों के साथ “स्वेच्छा से सहयोग” कर रहे हैं और अभी तक किसी भी प्रकार के उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई है।

राजनैतिक प्रतिक्रिया और जेपीसी की मांग इन नए खुलासों के बाद भारतीय राजनीति भी गरमा गई है। ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की 18 फरवरी की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इन नए तथ्यों को आधार बनाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि “बेनामी धन” का उपयोग करके अडाणी की कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदी गई। कांग्रेस ने एक बार फिर इस पूरे मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग दोहराई है।

अडाणी समूह ने इन सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि वे सभी कानूनों का पालन कर रहे हैं और भारतीय नियामक संस्थाओं ने उन्हें पहले ही क्लीन चिट दे दी है।