कैलिफोर्निया डीएमवी द्वारा बड़े पैमाने पर कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने पर रोक लगाने के लिए आपातकालीन आदेश दायर किया

कमर्शियल ड्राइवरों के कानूनी प्रतिनिधियों ने डी.एम.वी. को लगभग 20,000 सी.डी.एल (CDL) रद्द करने से रोकने के लिए एक आपातकालीन आदेश (Emergency Order) दायर किया है। डी.एम.वी. की इस कार्रवाई से प्रवासी और मजदूर वर्ग के परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।

Civil Rights Groups File Emergency Order to Halt Mass CA-DMV CDL Cancellations

कैलिफोर्निया — एशियन लॉ कॉकस, सिख कोएलिशन, वील, गोत्शल एंड मैंगेस एलएलपी और जकारा मूवमेंट सहित नागरिक अधिकार समूहों और कानूनी प्रतिनिधियों के एक गठबंधन ने कैलिफोर्निया मोटर वाहन विभाग (CA-DMV) के खिलाफ आपातकालीन आदेश दायर करने की घोषणा करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस लिखित बयान के अनुसार, जिसकी एक प्रति सिख सियासत न्यूज़ (SSN) के पास उपलब्ध है, ये समूह शुक्रवार, 6 मार्च को होने वाले बड़े पैमाने पर कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) रद्द किए जाने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।

लाइसेंस रद्द होने के इस खतरे ने लगभग 20,000 कमर्शियल ड्राइवरों की आजीविका को संकट में डाल दिया है, जो वैध सी.डी.एल के बिना अपनी नौकरी नहीं कर सकते हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में, अल्मेडा काउंटी के कैलिफोर्निया सुपीरियर कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि डी.एम.वी. को एक स्पष्ट प्रक्रिया प्रदान करनी चाहिए ताकि रद्द किए गए लाइसेंस वाले ड्राइवर तुरंत दोबारा आवेदन कर सकें। हालांकि, इस फैसले के बाद से, ड्राइवरों को डी.एम.वी. की ओर से भ्रमित करने वाली और असंगत जानकारी मिल रही है। कानूनी समूहों का तर्क है कि जब तक राज्य अपनी प्रक्रियाओं को स्पष्ट नहीं करता, तब तक ड्राइवरों को अनिश्चित काल तक बेरोजगारी से बचाने के लिए इस कार्रवाई पर रोक लगाना अत्यंत आवश्यक है।

गठबंधन द्वारा दी गई यह कानूनी चुनौती, दिसंबर 2025 में इन समूहों द्वारा दायर किए गए ‘डो बनाम गॉर्डन’ (Doe v. Gordon) क्लास-एक्शन मुकदमे (class-action lawsuit) का ही अगला कदम है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि तत्काल अदालती सुरक्षा के बिना, ड्राइवरों को डी.एम.वी. की अपनी नौकरशाही गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

सिख कोएलिशन की लीगल डायरेक्टर मनमीत कौर ने कहा, “जो लोग कैलिफोर्निया की अर्थव्यवस्था को चलाते हैं, वे पिछले कई महीनों की इस अफरा-तफरी से बेहतर व्यवहार के हकदार हैं। हम यह आदेश इसलिए मांग रहे हैं ताकि डी.एम.वी. को हजारों योग्य ड्राइवरों को सड़कों से हटाने से रोका जा सके और अदालत के पिछले आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। संक्षेप में, डी.एम.वी. को हमारे समुदायों पर आर्थिक तंगी थोपने के बजाय, अपनी प्रक्रियाओं को स्पष्ट करना चाहिए और अपनी गलतियों को सुधारना चाहिए।”

जकारा मूवमेंट के कार्यकारी निदेशक दीप सिंह ने कहा, “जब से ये पत्र जारी हुए हैं, प्रवासी ड्राइवर अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं, और 6 मार्च को उनके सी.डी.एल रद्द करने से मजदूर परिवारों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। कई ड्राइवरों के लिए, यह उनके परिवार का पेट भरने का एकमात्र साधन है। चूंकि डी.एम.वी. ने कोई निष्पक्ष या स्पष्ट प्रक्रिया प्रदान नहीं की है, इसलिए हम आपातकालीन राहत के लिए अदालतों का रुख कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि वे इन श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आगे आएंगे।”

कानूनी विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि ड्राइवरों ने उन सभी कानूनों और नियमों का पालन किया था जो उनके लिए आवश्यक थे, जिसके कारण सरकार की यह कार्रवाई बुनियादी तौर पर अनुचित है।

एशियन लॉ कॉकस की सीनियर स्टाफ अटॉर्नी कैथरीन झाओ ने कहा, “राज्य की अपनी गलती के कारण हजारों ड्राइवर अपनी आजीविका खोने वाले हैं—और यह अस्वीकार्य है। ड्राइवर तंग आ चुके हैं और डरे हुए हैं, और हम एक आपातकालीन आदेश की मांग कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ड्राइवर 7 मार्च को भी उठकर अपनी ड्यूटी पर जा सकें। इन श्रमिकों ने वह सब कुछ किया जो कानून के लिए आवश्यक था, फिर भी उन्हें उस नौकरशाही विफलता के लिए दंडित किया जा रहा है जो उन्होंने नहीं की। राज्य पहले लोगों के लाइसेंस छीनकर बाद में समाधान नहीं निकाल सकता। यह रद्द करने की कार्रवाई अभी रोकी जानी चाहिए।”