चंडीगढ़: सिख संगठन ‘दल खालसा‘ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पर तीखा हमला बोला है। दोनों नेताओं के बीच संसद के बाहर हुई हालिया तनातनी के बाद, दल खालसा ने कहा कि ये दोनों “एक ही थैली के चट्टे-बट्टे” हैं और उन शासकों के वारिस हैं जिनके हाथ सिखों के खून से रंगे हैं।

दल खालसा ने अपने बयान में कहा कि भले ही आज ये दोनों सियासी विरोधी दिख रहे हों, लेकिन इनका राजनीतिक सफर कांग्रेस से ही जुड़ा रहा है और दोनों ही सिखों पर जुल्म करने वाली विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आरोप और विरासत दल खालसा नेता परमजीत सिंह मंड ने दोनों नेताओं के पारिवारिक इतिहास पर निशाना साधते हुए कहा:
-
रवनीत बिट्टू: उनके दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हाथों पर सिखों का खून है। संगठन का आरोप है कि 1990 के दशक में बेअंत सिंह के शासनकाल में सिख युवाओं की हत्याएं आम बात थीं।
-
राहुल गांधी: उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जून 1984 में दरबार साहिब पर हमले (ऑपरेशन ब्लू स्टार) और हजारों निर्दोष सिख श्रद्धालुओं की हत्या के लिए जिम्मेदार थीं। वहीं, राहुल के पिता राजीव गांधी को नवंबर 1984 के सिख कत्लेआम का जिम्मेदार ठहराया गया।

क्यों ठहराया जा रहा है जिम्मेदार? यह पूछे जाने पर कि दादा के गुनाहों के लिए पोते को जिम्मेदार ठहराना कितना उचित है, परमजीत सिंह मंड ने तर्क दिया कि रवनीत बिट्टू ने हमेशा अपने दादा बेअंत सिंह की विरासत पर गर्व किया है और उनके कार्यों का बचाव किया है। इसी तरह, राहुल गांधी भी गांधी परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करते हैं।
मुख्य बिंदु:
-
माफी नहीं मांगी: संगठन ने कहा कि दोनों नेताओं ने कभी भी अपने बुजुर्गों के पापों के लिए सिख समुदाय से स्पष्ट रूप से माफी नहीं मांगी है।
-
रवनीत का ‘कबूलनामा’: मंड ने तंज कसते हुए कहा कि रवनीत बिट्टू का यह हालिया बयान—कि कांग्रेस ने गुरुद्वारों पर हमले किए और निर्दोष सिखों को मारा—एक तरह से उनके अपने दादा और राहुल गांधी के परिवार के पापों का ‘कबूलनामा’ है।
दल खालसा ने स्पष्ट किया कि भले ही रवनीत बिट्टू कांग्रेस के लिए बागी हो सकते हैं, लेकिन सिखों के लिए वह एक अत्याचारी शासक के वारिस ही माने जाएंगे।
