सिएटल, अमेरिका: सिख इतिहास शूरवीरता, कुर्बानियों और शहादतों से भरा हुआ है, जिसमें सिंहों के साथ-साथ बीबियों (सिख महिलाओं) द्वारा भी भरपूर योगदान दिया गया है। अगर 20वीं सदी के आखिरी दशकों में चले सिख आज़ादी संग्राम की बात की जाए, तो इसमें भी बीबियों ने अदम्य साहस दिखाया है और सब्र-सिदक के साथ कुर्बानियां व शहादतें दी हैं।

इस ऐतिहासिक संग्राम में सिख महिलाओं की भूमिका को कलमबद्ध करने का कार्य कुछ साल पहले भाई परमजीत सिंह पंजवड़ की प्रेरणा से शुरू हुआ था। इसी कड़ी का तीसरा भाग “कौरनामा-3: जून 84 श्री दरबार साहिब ‘च शहीद बीबियां दी गाथा” (जून 84 श्री दरबार साहिब में शहीद बीबियों की गाथा) हाल ही में प्रकाशित हुआ है।
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‘कौरनामा-3’ किताब पंजाब, जर्मनी और कनाडा के बाद अब अमेरिका में भी जारी हो चुकी है। पिछले रविवार को अमेरिका के शहर सिएटल में भाई परमजीत सिंह पंजवड़ निमित्त आयोजित हुए शहीदी समागम के दौरान ‘कौरनामा-3’ किताब सिख संग्राम से संबंधित शख्सियतों द्वारा जयकारों की गूंज के बीच जारी की गई।

गौरतलब है कि भाई परमजीत सिंह पंजवड़ की शहादत के बाद पंथ सेवक शख्सियत भाई दलजीत सिंह की सरपरस्ती में ‘कौरनामा’ श्रृंखला के तहत इतिहास को सहेजने का यह कार्य पिछले तीन सालों से निरंतर जारी है।
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कौरनामा किताब का पहला भाग मई 2024 में भाई पंजवड़ के पहले शहीदी दिवस के मौके पर जारी किया गया था।
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किताब का दूसरा भाग मई 2025 में जारी हुआ।
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और अब इसका तीसरा भाग मई 2026 में जारी किया गया है।
यह महत्वपूर्ण पुस्तक श्रृंखला यूरोप में रहने वाले सिख संघर्ष के पथिकों के सहयोग से वरिष्ठ पत्रकार और लेखक बलजिंदर सिंह कोटभारा द्वारा लिखी जा रही है।
अमेरिका में किताब जारी करने के इस विशेष मौके पर सिख फेडरेशन अमेरिका, सिख यूथ ऑफ अमेरिका, गुरुद्वारा साहिब के प्रबंधक और अन्य सिख जत्थेबंदियों (संगठनों) के प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित थे।
