कनाडा के पीएम मार्क कार्नी की पहली भारत यात्रा के दौरान ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ को लेकर उठे सवाल

कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नई दिल्ली में नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बीच, सिख पैरोकार समूहों ने चेतावनी दी है कि विश्व स्तर पर उनकी साख इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कनाडाई धरती पर होने वाले कथित अंतरराष्ट्रीय दमन और हिंसक अपराधों का मुद्दा उठाते हैं या नहीं।

Mark Carney Visit to India for Trade Deal

लंदन — कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें एक अहम कूटनीतिक परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है, वहीं सिख फेडरेशन (यूके) ने कड़ी चेतावनी दी है कि उनकी अंतरराष्ट्रीय साख दांव पर है। एक साल से भी कम समय पहले नाटकीय रूप से सत्ता में आने के बाद से नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत करने वाले कार्नी पर अब सिख समूह की ओर से भारी दबाव है कि वे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अंतरराष्ट्रीय दमन (transnational repression) की बढ़ती चिंताओं का मुद्दा उठाएं।

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कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (फाइल फोटो)

संगठन द्वारा आज जारी किए गए लिखित बयान के अनुसार, जिसकी एक प्रति सिख सियासत के पास उपलब्ध है, कनाडा की संप्रभुता के प्रति कार्नी का मजबूत बचाव—जिसने शुरुआत में देश में उनकी लोकप्रियता बढ़ाई थी—अब वैश्विक मंच पर अपनी सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रहा है।

सिख फेडरेशन (यूके) के प्रमुख कार्यकारी, दबिंदरजीत सिंह ओबीई (OBE) ने इस द्विपक्षीय बैठक के अहम मायनों पर जोर दिया।

दबिंदरजीत सिंह ने कहा, “आज भारत में मार्क कार्नी की साख दांव पर है। सवाल यह है कि क्या वे कानून के शासन और कनाडा की संप्रभुता की रक्षा करेंगे या यह स्वीकार करेंगे कि वे भारत की धमकियों और आर्थिक दबाव के नए शिकार बन गए हैं।”

कनाडाई धरती पर बढ़ते खतरे

कनाडाई प्रधानमंत्री के लिए यह कूटनीतिक दुविधा विदेशी हस्तक्षेप और हिंसक अपराधों के लगातार लग रहे आरोपों से जुड़ी है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत सरकार “अंतरराष्ट्रीय दमन में अपनी भूमिका को पूरी तरह से नकार रही है,” जिसमें सिख कार्यकर्ता हरदीप सिंह निज्जर की हाई-प्रोफाइल हत्या भी शामिल है।

सिख फेडरेशन (यूके) ने कनाडाई नागरिकों के लिए उत्पन्न हुए नए और बढ़ते खतरों की ओर इशारा किया। इसी सप्ताह, कनाडाई पुलिस ने संगठन की कनाडाई सहयोगी संस्था सिख फेडरेशन कनाडा के प्रमुख मोनिंदर सिंह को उनकी जान पर “विश्वसनीय खतरे” (credible threat) को लेकर चेतावनी जारी की है।

बयान में दबिंदरजीत सिंह ने बताया, “इस बार पुलिस की चेतावनी में अलग बात यह है कि उन्हें बताया गया है कि उनकी पत्नी और बच्चों को भी खतरे में माना जा रहा है।” उन्होंने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि कार्नी इस बात से भली-भांति वाकिफ हैं कि “भारत स्थित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट्स द्वारा रंगदारी (extortion) मांगने के मामलों में भारी वृद्धि हुई है, जिनका भारत सरकार और भारतीय खुफिया एजेंटों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग और प्रचार किया जाता है।”

‘नियम-आधारित’ नेतृत्व की परीक्षा

प्रधानमंत्री कार्नी ने हाल ही में दावोस, स्विट्जरलैंड में विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) का उपयोग देशों से “बड़ी शक्तियों द्वारा आर्थिक दबाव” को खारिज करने का आह्वान करने के लिए किया था। हालांकि, आलोचकों ने चेतावनी दी है कि अगर वे पीएम मोदी के साथ भारत के कथित कार्यों पर सीधे बात करने में विफल रहते हैं, तो उनका यह रुख गंभीर रूप से कमजोर हो जाएगा।

यह बयान कार्नी के दावोस भाषण और भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा पूर्व में की गई टिप्पणियों के बीच एक स्पष्ट विरोधाभास खींचता है।

दबिंदरजीत सिंह ने आगे कहा, “जैसे ही मार्क कार्नी नरेंद्र मोदी से मिलने की तैयारी कर रहे हैं, हम उन्हें याद दिलाना चाहते हैं कि अप्रैल 2024 में मोदी ने एक चुनावी भाषण में खौफनाक तरीके से कहा था जो कि व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया था: ‘हम डोजियर नहीं भेजते; हम उन्हें उनके घरों में मारते हैं।'”

सिख फेडरेशन (यूके) ने अपने बयान का समापन एक सख्त चेतावनी के साथ किया: “इसलिए मार्क कार्नी पर पूरी तरह से पाखंड का आरोप लगेगा यदि वे कनाडा की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हैं और भारत सरकार द्वारा किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय दमन और कनाडाई धरती पर हिंसक अपराधों को बढ़ावा देने पर कड़ी आपत्ति नहीं जताते हैं।”

जैसे ही दोनों नेताओं की मुलाकात होगी, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक और प्रवासी समुदाय इस बात पर करीब से नज़र रखेंगे कि क्या कनाडा की संप्रभुता और कानून का शासन कार्नी की विदेश नीति के गैर-समझौतावादी स्तंभ बने रहते हैं या नहीं।