दिल्ली की भाजपा सरकार ने प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की स्थायी रिहाई का मामला रद्द किया

दिल्ली सरकार के सजा समीक्षा बोर्ड ने प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की स्थायी रिहाई का मामला एक बार फिर खारिज कर दिया है। जारी दस्तावेजों के मुताबिक, जहां 20 साल से कम सजा वाले 24 कैदियों को रिहाई मिल गई है, वहीं 1995 से जेल में बंद प्रो. भुल्लर को कोई राहत नहीं दी गई। इस फैसले ने भाजपा में शामिल सिख नेताओं की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Prof. Davinderpal Singh Bhullar

नई दिल्ली: भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार द्वारा प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की स्थायी रिहाई का मामला रद्द कर दिया गया है। यह जानकारी सिख राजनीतिक कैदियों, जिन्हें आमतौर पर ‘बंदी सिंह’ कहा जाता है, के मामलों की पैरवी करने वाले ‘पंज-आब लॉयर्स’ के प्रमुख एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर द्वारा साझा की गई है।

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प्रो. दविंदर पाल सिंह भुल्लर | फ़ाइल तस्वीर

दिल्ली सरकार के सजा समीक्षा बोर्ड की कार्रवाई का विवरण: एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर द्वारा ‘सिख सियासत’ को भेजे गए दस्तावेजों से पता चलता है कि भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के ‘सजा समीक्षा बोर्ड’ (सेंटेंस रिव्यू बोर्ड) की बैठक 23 दिसंबर 2025 को हुई थी, जिसमें प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की स्थायी रिहाई के मामले पर भी विचार किया गया था। इस बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) की भाजपा सरकार के महानिदेशक जेल (DG Prisons) के कार्यालय द्वारा 6 फरवरी 2026 को एक पत्र जारी किया गया है। इसके साथ संलग्न सूचियों के अनुसार, 23 दिसंबर की बैठक में सजा समीक्षा बोर्ड द्वारा कुल 60 मामलों पर विचार किया गया था। इनमें से 26 उम्रकैदियों को स्थायी रिहाई दे दी गई है, जबकि 24 मामलों में स्थायी रिहाई का केस रद्द कर दिया गया है। रद्द हुए मामलों की सूची में प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर का नाम चौथे स्थान पर है।

26 में से 24 उम्रकैदियों को 20 साल से पहले ही रिहाई: जिन 26 उम्रकैदियों को स्थायी रिहाई दी गई है, उनमें से सिर्फ 2 ने ही 20 साल की कैद पूरी की है, जबकि बाकी 24 कैदियों की कैद के 20 साल पूरे होने अभी बाकी थे। इनमें से 8 कैदी ऐसे हैं जिनकी 20 साल की कैद पूरी होने में अभी 5-6 साल बाकी हैं और उनकी कैद के 20 साल 2031 में पूरे होने हैं, फिर भी उन्हें स्थायी रिहाई दे दी गई है।

30 साल पूरे करने के बावजूद भी प्रो. भुल्लर को रिहा नहीं किया: जहाँ एक तरफ भाजपा सरकार द्वारा 20 साल की कैद से पहले ही कई उम्रकैदियों को स्थायी रिहाई दी गई है, वहीं दूसरी तरफ प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर को 30 साल से कैद में होने के बावजूद भी रिहा नहीं किया गया। गौरतलब है कि प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर 1995 से कैद में हैं।

क्या भाजपा में शामिल सिख चेहरों की पार्टी में कोई अहमियत नहीं है? भारतीय जनता पार्टी में शामिल कई सिख चेहरे जैसे आर.पी. सिंह और मनजिंदर सिंह सिरसा, प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर को स्थायी रिहाई देने की वकालत करते रहे हैं। इन नेताओं द्वारा बीते समय में आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के दौरान प्रो. भुल्लर को स्थायी रिहाई न दिए जाने की आलोचना की जाती रही है।

हाल के समय में भाजपा नेता आर.पी. सिंह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर प्रो. भुल्लर को स्थायी रिहाई देने की मांग की थी। लेकिन फिर भी भाजपा सरकार के सजा समीक्षा बोर्ड ने प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की स्थायी रिहाई खारिज कर दी है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा में जाने वाले सिख राजनेताओं की पार्टी में कोई पूछ नहीं है और सिखों के संवेदनशील मामलों में भाजपा के उच्च नेताओं द्वारा उनकी बात अनसुनी कर दी जाती है?