न्यूयोर्क: बुधवार (18 फरवरी) को व्हाइट हाउस के ‘सिचुएशन रूम’ (आपातकालीन कक्ष) में ट्रंप प्रशासन के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों की बैठक हुई। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस को यह जानकारी दी गई है कि अमेरिकी सेना सप्ताहांत तक ईरान पर हमले के लिए तैयार हो सकती है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी राष्ट्रपति को विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने भी स्थिति से अवगत कराया है।
ट्रंप का रुख:
राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में संकेत दिया था कि यदि ईरान परमाणु समझौते (Nuclear Deal) पर सहमत नहीं होता है, तो उस पर हमला किया जा सकता है। सीएनएन ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि ट्रंप इस विषय पर गहराई से विचार कर रहे हैं, इसलिए यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह सप्ताहांत तक हमले का अंतिम आदेश देंगे या नहीं। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को ईरान के खिलाफ ऐसे सैन्य विकल्पों की जानकारी दी गई है जिनका उद्देश्य “अधिकतम नुकसान पहुंचाना” है।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा:
अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति काफी बढ़ा दी है। ट्रंप प्रशासन ने क्षेत्र में एक दूसरा विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) भेजा है। सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ और उसके लगभग 80 लड़ाकू विमान रविवार तक ईरानी तट से करीब 700 किलोमीटर की दूरी पर तैनात थे।
सीएनएन के मुताबिक, अमेरिकी वायु सेना यूनाइटेड किंगडम में स्थित अपने लड़ाकू विमानों और हवा में ईंधन भरने वाले विमानों (Refueling tankers) को भी मध्य पूर्व में स्थानांतरित कर रही है। इसके अलावा, उड़ान-ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि हाल के हफ्तों में कई अमेरिकी सैन्य मालवाहक विमानों ने अमेरिका से जॉर्डन, बहरीन और सऊदी अरब तक भारी मात्रा में उपकरण पहुंचाए हैं।
ईरान की प्रतिक्रिया और सैन्य अभ्यास:
इस बीच, ईरान भी अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। इस सप्ताह की शुरुआत में ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में युद्ध अभ्यास शुरू कर दिया है। ईरानी राजनेताओं ने तेल और गैस के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को अवरुद्ध करने की चेतावनी भी दी है।
कूटनीतिक प्रयास और चेतावनियां:
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बुधवार को चेतावनी दी कि दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के साथ समझौता करना ईरान के लिए “बुद्धिमानी” होगी। उन्होंने संवाददाताओं को बताया:
जिनेवा में हाल की वार्ता में थोड़ी प्रगति हुई है, लेकिन दोनों पक्ष अभी भी कुछ मुद्दों पर एक-दूसरे से काफी दूर हैं।
अमेरिका को उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों में ईरान विस्तृत जानकारी के साथ वापस आएगा।
लेविट ने स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई पर विचार करने से पहले ट्रंप के लिए कूटनीति (Diplomacy) ही पहला विकल्प है।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ भविष्य की वार्ता के लिए एक रूपरेखा “तैयार” कर रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने जोर देकर कहा कि तेहरान “युद्ध नहीं चाहता”, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी के दबाव में झुकेंगे नहीं।
वहीं, अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोहराया कि वाशिंगटन तेहरान को “किसी भी तरह से” परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेगा।
