संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कनाडा को लिखा पत्र, सिख कार्यकर्ता पर भारत के ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ का उठाया मुद्दा

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के पांच विशेष दूतों ने कनाडा सरकार से सिख फेडरेशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोनिंदर सिंह की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। विशेषज्ञों ने इसे भारत द्वारा विदेशों में सिख असंतुष्टों के ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ के व्यापक पैटर्न का हिस्सा बताया है और भारत सरकार के साथ भी इस पत्र को साझा किया है।

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जिनेवा, स्विट्जरलैंड: संयुक्त राष्ट्र (UN) के पांच विशेष दूतों और स्वतंत्र विशेषज्ञों ने कनाडा सरकार को एक संयुक्त पत्र लिखा है। यह पत्र सिख फेडरेशन (कनाडा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता, भाई मोनिंदर सिंह के खिलाफ लगातार हो रहे खतरों और प्रतिशोध की घटनाओं के संबंध में है। इस आधिकारिक संचार में इन धमकियों को स्पष्ट रूप से भारत के ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ (Transnational Repression) के व्यापक ढांचे के तहत रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके जरिए भारत, प्रवासी सिख असंतुष्टों और कार्यकर्ताओं को विदेशों में निशाना बना रहा है। इस पत्र की एक प्रति भारत सरकार को भी भेजी गई है।

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सिख फेडरेशन (कनाडा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता भाई मोनिंदर सिंह

इन UN मानवाधिकार अधिकारियों ने जारी किया पत्र

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UN Human Rights Council) के जिन शीर्ष अधिकारियों ने यह संयुक्त पत्र जारी किया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • बैन साउल (Ben Saul): आतंकवाद का मुकाबला करते हुए मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने तथा उनके संरक्षण के लिए विशेष दूत।

  • जीना रोमेरो (Gina Romero): शांतिपूर्ण सभा और संघ बनाने की स्वतंत्रता के अधिकारों के लिए विशेष दूत।

  • एंड्रिया बोलानोस वर्गास (Andrea Bolaños Vargas): मानवाधिकार रक्षकों की स्थिति पर विशेष दूत।

  • जॉर्ज कैत्रोगालोस (George Katrougalos): एक लोकतांत्रिक और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ।

  • नजीला घनिया (Nazila Ghanea): धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता के लिए विशेष दूत।

संयुक्त राष्ट्र के इन अधिकारियों का यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा और सीमा पार राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के प्रति बढ़ती वैश्विक चिंताओं को दर्शाता है।

भारत के अंतरराष्ट्रीय दमन (Transnational Repression) पर संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों द्वारा जारी कनाडा सरकार को भेजे गए आधिकारिक पत्र की प्रति यहाँ पढ़ें:


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