लंदन — सिख फेडरेशन (यूके) द्वारा जारी एक सख्त लिखित बयान में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की चार दिवसीय भारत यात्रा से पहले कनाडा सरकार के रवैये पर गंभीर चिंता जताई गई है। सिख सियासत न्यूज़ (SSN) को प्राप्त इस बयान के अनुसार, यह चिंता मुख्य रूप से ट्रांसनेशनल रिप्रेशन (अंतरराष्ट्रीय दमन) से जुड़े सवालों से निपटने के कनाडा सरकार के तरीके को लेकर है।
मुंबई में अनीता आनंद के ‘कार-क्रैश इंटरव्यू’ पर विवाद यह पूरा विवाद मुंबई में हाल ही में हुए एक मीडिया इंटरैक्शन के बाद खड़ा हुआ है, जहां कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद से पत्रकारों ने तीखे सवाल पूछे थे। फेडरेशन की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आनंद यह स्पष्ट करने में पूरी तरह विफल रहीं कि क्या वह उन अज्ञात कनाडाई अधिकारियों की बात से सहमत हैं, जिन्होंने बुधवार को कहा था कि “यदि भारत सरकार अभी भी सिख कार्यकर्ताओं और व्यवसायों को निशाना बनाने, राजनीतिक हस्तक्षेप और हिंसा में शामिल है, तो प्रधानमंत्री कार्नी भारत की यात्रा नहीं करेंगे।”

सिख फेडरेशन (यूके) ने इस प्रेस वार्ता को एक “कार-क्रैश इंटरव्यू” (बेहद खराब साक्षात्कार) करार दिया है। संगठन ने तंज कसते हुए कहा कि मंत्री आनंद “हां या ना में एक साधारण से सवाल का जवाब देने में भी विफल रहीं।”
आर.सी.एमपी और सीए.एस.आई.एस के पास मौजूद हैं सबूत सिख फेडरेशन (यूके) के प्रमुख कार्यकारी जसपाल सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि कनाडाई सरकार के पास इन मौजूदा खतरों के बारे में पर्याप्त खुफिया जानकारी है। बयान में कहा गया है कि, “अनीता आनंद अच्छी तरह जानती हैं कि आर.सी.एमपी और सीए.एस.आई.एस के पास इस बात के पर्याप्त सबूत और खुफिया जानकारी है कि कनाडा में विदेशी राजनीतिक हस्तक्षेप, हिंसा और पारराष्ट्रीय दमन अभी भी एक गंभीर और वास्तविक खतरा बना हुआ है।”
पीएम मार्क कार्नी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें सिख वकालत समूह ने चेतावनी दी है कि सरकार के रुख को स्पष्ट करने में यह विफलता अब निश्चित रूप से प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के लिए मुश्किलें (हॉट सीट) खड़ी करेगी। विज्ञप्ति के अनुसार, “अनीता आनंद द्वारा स्थिति स्पष्ट करने का मौका चूकने से अब यह तय हो गया है कि कनाडाई पत्रकार सोमवार को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे मार्क कार्नी से यही सवाल पूछेंगे। इससे बचने का एकमात्र रास्ता यह है कि कनाडाई अधिकारियों द्वारा दिए गए गलत बयानों को स्पष्ट करने के लिए तत्काल कोई लिखित बयान जारी किया जाए।”
बयान के अंत में सिख फेडरेशन (यूके) ने दावा किया कि इस पूरी घटना से विदेश मंत्री अनीता आनंद की “प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है, क्योंकि उनके लिए कनाडाई सरकारी अधिकारियों की नासमझी भरी टिप्पणियों से खुद को दूर रखना कहीं ज्यादा आसान विकल्प होता।”

