चार संघर्षशील सिख जत्थेबंदियों ने सरबत खालसा 1986 की 40वीं वर्षगांठ पर अहम ऐलान किए

सरबत खालसा 1986 की 40वीं वर्षगांठ पर सिख जत्थेबंदियों ने अमृतसर में एकत्रता की और सरबत खालसा के लिए साझा विधि-विधान तैयार करने का ऐलान किया।

Joint Declaration by Panch Pardhani Jatha, Dal Khalsa, Bhai Jagtar Singh Hawara Committee and Shiromani Akali Dal Amritsar Mann at Akal Takht Sahib on 26 January 2026 26 जनवरी 2026 को अकाल तख्त साहिब पर पंच प्रधानी जत्था, दल खालसा, भाई जगतार सिंह हवारा कमेटी और शिरोमणि अकाली दल अमृतसर (मान) की ओर से साझा ऐलाननामा (घोषणापत्र)।

अमृतसर: चार संघर्षशील आज़ादी पसंद सिख संगठनों (जत्थेबंदियों) – भाई जगतार सिंह हवारा कमेटी, दल खालसा, पंच प्रधानी जत्था और शिरोमणि अकाली दल अमृतसर – ने 26 जनवरी 1986 को श्री अकाल तख्त साहिब पर हुए सरबत खालसा की 40वीं याद साझे तौर पर मनाई। इस मौके पर 26 जनवरी 2026 वाले दिन श्री अमृतसर में गुरुद्वारा संतोखसर साहिब के नज़दीक एक साझा समागम (कार्यक्रम) किया गया।

26 जनवरी 2026 को अमृतसर में हुए समागम (एकत्रता) के दौरान उपस्थित संगत का एक दृश्य। View of the Sangat during the gathering at Amritsar on 26 January 2026
26 जनवरी 2026 को अमृतसर में हुए समागम (एकत्रता) के दौरान उपस्थित संगत का एक दृश्य।

समागम की शुरुआत में अपने विचार साझा करते हुए भाई जगतार सिंह हवारा कमेटी के प्रवक्ता प्रोफ़ेसर बलजिंदर सिंह ने कहा कि भारतीय स्टेट मौजूदा समय में सिख पहचान को खत्म करने के लिए कई हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि इस समय पंजाब और सिख गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और भारतीय स्टेट द्वारा सिखों को राजनीतिक, भाषाई, सांस्कृतिक और आर्थिक नस्लकुशी का निशाना बनाया जा रहा है।

भाई जगतार सिंह हवारा कमेटी के प्रवक्ता प्रोफ़ेसर बलजिंदर सिंह, अमृतसर में सरबत खालसा 1986 की 40वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने विचार साझा करते हुए। Prof.-Baljinder-Singh-spokesperson-of-Bhai-Jagtar-Singh-Hawara-Committee-addressing-the-gathering-on-40th-anniversary-of-Sarbat-Khalsa-1986-at-Amritsar
भाई जगतार सिंह हवारा कमेटी के प्रवक्ता प्रोफ़ेसर बलजिंदर सिंह, अमृतसर में सरबत खालसा 1986 की 40वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने विचार साझा करते हुए।

पूर्व सांसद और शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान ने पंजाब के आर्थिक हालातों पर बात करते हुए कहा कि इंडियन स्टेट द्वारा पंजाब की सरहदों के ज़रिए होता व्यापार रोककर पंजाब और सिखों की अर्थव्यवस्था को बड़ी चोट पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि अटारी-वाघा बॉर्डर के ज़रिए मध्य एशिया तक होने वाले व्यापार को रोककर इंडियन स्टेट द्वारा पंजाब के व्यापारी वर्ग और किसानों को आर्थिक नुकसान पहुँचाया जा रहा है। स. मान ने कहा कि भारत का मौजूदा राजनीतिक ढांचा एकतरफा फैसले लेता है और इन फैसलों में सिख कौम की शमूलियत नहीं करवाई जाती। उन्होंने कहा कि यह वह ढांचा नहीं है जिसका वादा 1947 के बंटवारे के वक्त भारत के राजनीतिक नेताओं ने सिखों से किया था।

पूर्व सांसद और शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान, अमृतसर में सरबत खालसा 1986 की 40वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने विचार साझा करते हुए। Former MP and SAD Amritsar president S. Simranjit Singh Mann addressing the gathering on 40th anniversary of Sarbat Khalsa 1986 at Amritsar
पूर्व सांसद और शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान, अमृतसर में सरबत खालसा 1986 की 40वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने विचार साझा करते हुए।

पंथ सेवक शख्सियतों के पंच प्रधानी जत्थे की ओर से अपने विचार साझा करते हुए भाई दलजीत सिंह बिट्टू ने सिख संघर्ष के समूह शहीदों और संघर्ष में योगदान डालने वाले परिवारों, महिलाओं और बुजुर्गों को श्रद्धांजलि व सत्कार भेंट किया। उन्होंने कहा कि खालसा पंथ राज का स्वयं-सिद्ध अधिकारी है और खालिस्तान गुरमत के ‘हलेमी राज’, ‘बेगमपुरा’ और ‘सरबत के भले’ के आदर्शों पर आधारित राज प्रणाली है। इस प्रणाली को संसार में हकीकत बनाने के लिए इसकी राजनीतिक स्थापना ज़रूरी है।

पंथ सेवक शख्सियतों के पंच प्रधानी जत्थे की ओर से भाई दलजीत सिंह बिट्टू, अमृतसर में सरबत खालसा 1986 की 40वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने विचार साझा करते हुए। Panth Sewak Bhai Daljit Singh addressing the gathering on 40th anniversary of Sarbat Khalsa 1986 at Amritsar
पंथ सेवक शख्सियतों के पंच प्रधानी जत्थे की ओर से भाई दलजीत सिंह बिट्टू, अमृतसर में सरबत खालसा 1986 की 40वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने विचार साझा करते हुए।

बदल रहे अंतर्राष्ट्रीय हालातों का ज़िक्र करते हुए भाई दलजीत सिंह ने कहा कि हाल ही में अज़रबैजान की राजधानी बाकू में सिख मसलों पर हुई अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस बहुत अहमियत रखती है। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टेट पंजाब में अफरातफरी का माहौल बना रही है और कानून व्यवस्था व गैंगस्टरिज़्म की आड़ में स्टेट की एजेंसियों द्वारा सिख नेताओं को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर इस वक्त अस्थिरता बढ़ रही है और इस क्षेत्र में भी टकरावों वाला माहौल बन रहा है। इसलिए यह बहुत ज़रूरी हो जाता है कि सिखों द्वारा साझे मंचों का निर्माण किया जाए और फैसले लेने व सांझी लीडरशिप उभारने की गुरमत आधारित विधियों पर सहमति बनाई जाए। 1986 के सरबत खालसा से हमें यही दिशा (सेध) मिलती है।

Dal Khalsa spokesperson S. Kanwarpal Singh addressing the gathering on 40th anniversary of Sarbat Khalsa 1986 at Amritsar दल खालसा के प्रवक्ता स. कंवरपाल सिंह, अमृतसर में सरबत खालसा 1986 की 40वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने विचार साझा करते हुए।
दल खालसा के प्रवक्ता स. कंवरपाल सिंह, अमृतसर में सरबत खालसा 1986 की 40वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने विचार साझा करते हुए।

दल खालसा के प्रवक्ता स. कंवरपाल सिंह ने 1986 के सरबत खालसा को तत्कालीन सिख इतिहास का एक अहम मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इस सरबत खालसा ने अगले संघर्ष को दिशा और ताकत दी थी। उन्होंने कहा कि आज 40 साल बाद हम उस सरबत खालसा की सिर्फ याद ही नहीं मना रहे बल्कि हम भविष्य के लिए सांझी पहलों का ऐलान और संकल्प भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज के समागम के लिए इकट्ठी हुई चार जत्थेबंदियों का यह काफिला भविष्य में और बड़ा होगा और हमारी यह कोशिश होगी कि समूह पंथ-परस्त संघर्षशील जत्थेबंदियां साझे तौर पर आगे बढ़ें।

इस समागम (कांफ्रेंस) की समाप्ति के उपरांत समूह उपस्थित लोगों द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब तक मार्च किया गया और अकाल तख्त साहिब के सन्मुख साझा ऐलाननामा और संकल्प (अहद) पढ़े गए।

Joint Declaration by Panch Pardhani Jatha, Dal Khalsa, Bhai Jagtar Singh Hawara Committee and Shiromani Akali Dal Amritsar Mann at Akal Takht Sahib on 26 January 2026 26 जनवरी 2026 को अकाल तख्त साहिब पर पंच प्रधानी जत्था, दल खालसा, भाई जगतार सिंह हवारा कमेटी और शिरोमणि अकाली दल अमृतसर (मान) की ओर से साझा ऐलाननामा (घोषणापत्र)।
26 जनवरी 2026 को अकाल तख्त साहिब पर पंच प्रधानी जत्था, दल खालसा, भाई जगतार सिंह हवारा कमेटी और शिरोमणि अकाली दल अमृतसर (मान) की ओर से साझा ऐलाननामा (घोषणापत्र)।

साझे ऐलाननामे को पढ़ने की जिम्मेदारी चारों जत्थेबंदियों की ओर से दल खालसा के कार्यकारी प्रधान भाई परमजीत सिंह मंड ने पंच प्रधानी जत्थे की ओर से भाई दलजीत सिंह और भाई रजिंदर सिंह मुगलवाल, भाई जगतार सिंह हवारा कमेटी की ओर से भाई भूपिंदर सिंह भलवान और शिरोमणि अकाली दल अमृतसर मान की ओर से प्रोफ़ेसर महिंदर पाल सिंह की हाज़िरी में निभाई।

इस ऐलाननामे में दो अहम पहलों का ऐलान किया गया है:

1. पहली पहल: इसमें कहा गया है कि “श्री अकाल तख्त साहिब पर यह पंथक सभा दुनिया भर के पंथ-परस्त जत्थों और संस्थाओं के साथ सलाह-मशविरा करके खालसा पंथ के सामने “सरबत खालसा” और “गुरमता” संस्थाओं के विधि-विधान का मसौदा-खाका रखेगी ताकि खालसा पंथ में इस बात पर सांझी सहमति बनाई जा सके कि आज के समय में सरबत खालसा कैसे बुलाया और चलाया जाए—जिसके तहत खालिसाई रवायतों और उसूलों के मुताबिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व के पैमाने, विचार-विमर्श, फैसला करने की प्रक्रिया, संस्थागत सुरक्षा प्रबंध, पारदर्शिता के मानक, और गुरमते को लागू करने और उसकी समीक्षा करने के सम्मानजनक ढंग तय किए जाएंगे”।

2. दूसरी पहल: 29 अप्रैल 1986 की ऐलाननामे की 40वीं वर्षगांठ के मौके पर बीते 40 सालों के संघर्ष के तजुर्बे, आज के पंथक और अंतर्राष्ट्रीय हालातों को ध्यान में रखते हुए खालिस्तान के हामी सिख जत्थों, जत्थेबंदियों, संस्थाओं आदि के साथ तालमेल करके खालिस्तान के संघर्ष की भविष्य की रणनीति के बारे में ‘एक साझा नीति दस्तावेज़’ तैयार करके सिख जगत के सन्मुख पेश किया जाएगा”।