चंडीगढ़: महाराष्ट्र सरकार द्वारा तख्त सचखंड श्री हजूर अबिचल नगर साहिब, नांदेड़ के प्रबंधन में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। सरकार इस संबंध में लगभग 70 साल पुराने (1956 में बने) कानून को रद्द करके एक नया कानून लागू करने जा रही है। सिख समुदाय को यह अंदेशा है कि इस नए कानून के जरिए तख्त साहिब के प्रबंधन में महाराष्ट्र सरकार की पहले से चली आ रही दखलअंदाजी और अधिक बढ़ जाएगी।
यही कारण है कि सिख समुदाय द्वारा सरकार के इस प्रस्तावित नए कानून का कड़ा विरोध किया जा रहा है। तख्त साहिब के पंज प्यारे साहिबान ने भी महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
गौरतलब है कि बीते रविवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में हुई कैबिनेट की बैठक में तख्त श्री हजूर साहिब के प्रबंधन को और अधिक सुचारू व गतिशील बनाने के नाम पर पुराने कानून को रद्द कर नया कानून बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह प्रस्ताव राज्य के वित्त मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले द्वारा पेश किया गया था।

पिछले दिनों तख्त साहिब के पंज प्यारे साहिबान, नांदेड़ की हजूरी साध संगत और अन्य प्रमुख सिख हस्तियों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में जत्थेदार सिंह साहिब बाबा कुलवंत सिंह, धूपिया भाई राम सिंह, मुख्य ग्रंथी भाई कश्मीर सिंह, ग्रंथी भाई मनबीर सिंह, मीत ग्रंथी भाई गुरमीत सिंह, रहरासिया भाई परमवीर सिंह, कथावाचक भाई सरबजीत सिंह और बाबा बलविंदर सिंह (लंगर साहिब वाले) सहित अन्य प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की।
ग्रंथी भाई मनबीर सिंह से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस दौरान पास किया गया गुरमता (प्रस्ताव) बीते दिन शाम के समय तख्त श्री हजूर साहिब से संगत के सामने सिंह साहिब ज्ञानी राम सिंह ने पढ़कर सुनाया।
उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के एक्ट के बारे में तख्त साहिब के पंज प्यारे साहिबान और समूह संगत के साथ एक बैठक हुई। इसमें यह विचार किया गया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा ‘नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबिचल नगर साहिब एक्ट 1956’ को पूरी तरह रद्द करके उसकी जगह ‘तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब अधिनियम 2026’ लागू करने का फैसला लिया गया है, जिसे विधानसभा के चालू सत्र में पास करवाने के लिए प्रस्ताव पेश किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समूह हजूरी संगत की मांग के अनुसार गहन विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है कि 1956 के एक्ट को पहले की तरह ही बरकरार रखा जाना चाहिए। नए अधिनियम का समूह हजूरी संगत और पंज प्यारे साहिबान द्वारा सर्वसम्मति से कड़ा विरोध किया जाता है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का कड़ा ऐतराज
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रबंधन बोर्ड से संबंधित 1956 के एक्ट को रद्द कर नया एक्ट बनाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि तख्त श्री हजूर साहिब की मर्यादा, प्रबंधन और धार्मिक स्वायत्तता से जुड़े किसी भी फैसले को लेने से पहले सिख संस्थाओं, तख्त साहिबान के जत्थेदार साहिबान और सिखों की प्रतिनिधि धार्मिक संस्था शिरोमणि कमेटी के साथ सलाह-मशविरा करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारें सिख संस्थाओं को कमजोर करने के लिए ऐसे भद्दे प्रयास कर रही हैं, जिसे सिख संगत कभी स्वीकार नहीं करेगी।
