फतेहगढ़ साहिब: अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में श्री गुरु ग्रंथ साहिब विश्व विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग और सिख शिक्षा परिषद, ब्रिटेन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय पंजाबी सम्मेलन का 20 फरवरी 2026 को सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय “पंजाब और सिख धर्म: मातृभूमि और प्रवासी सरोकार” था।
समापन के दिन कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीत पाल सिंह की अध्यक्षता में दो सत्र आयोजित किए गए। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने प्रवास और मातृभूमि के सरोकारों (आवास-प्रवास) को पंजाब के लिए एक प्रमुख समकालीन चुनौती बताया और इनका उचित समाधान खोजने के लिए गहन अकादमिक चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया।
पांचवें सत्र की मुख्य बातें पांचवें सत्र में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के प्रो. रंजीत सिंह घुम्मन ने प्रवास के सकारात्मक आयामों और इसके आर्थिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने तर्क दिया कि प्रभावी समाधान के लिए व्यक्तिगत प्रयासों के बजाय प्रणालीगत सुधारों की आवश्यकता है, तथा मजबूत कार्य संस्कृति और वैध प्रवास माध्यमों के महत्व को रेखांकित किया।

पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के डॉ. गुरप्रीत सिंह बराड़ ने प्रवास को मानव स्वभाव का एक अंतर्निहित पहलू माना। उन्होंने बाजार के प्रभावों और स्कूली तथा उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थितियों का विश्लेषण किया। वर्तमान चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने “सीखने आओ, सेवा करने जाओ” के सिद्धांत की वकालत की। इस सत्र में शिक्षा विभाग से डॉ. हरनीत बिलिंग, पंजाबी विभाग से डॉ. हरप्रीत कौर और राजनीति विज्ञान विभाग से डॉ. रमनदीप कौर ने भी अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
छठे सत्र और परिचर्चा के मुख्य बिंदु छठे सत्र में निम्नलिखित विद्वानों ने अपने विचार रखे:
– डॉ. खुशविंदर कुमार (खालसा विश्वविद्यालय, अमृतसर): पंजाब में प्रवास के प्रति दृष्टिकोण के सामाजिक, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक आयामों पर चर्चा की।
– प्रो. गुरमुख सिंह (पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला): बाहरी और आंतरिक प्रवास दोनों से पंजाब के घिरने और “अपनी भूमि” तथा “अस्तित्व” को फिर से खोजने की आवश्यकता को संबोधित किया।
– डॉ. सेवक सिंह (सिख विचारक, श्री आनंदपुर साहिब): प्रवास के बीच पंजाब की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत में विस्तार और संकुचन की अवधारणाओं पर प्रकाश डाला।
परिचर्चा (समूह चर्चा) का कुशल संचालन विवेकगढ़ मोहाली के स. हरबख्श सिंह ने किया। इसमें बैंगलोर के सिख विचारक और लेखक स. अमनदीप सिंह संधू शामिल हुए, जिन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सिख प्रवास की भूमिका, उनके ऐतिहासिक योगदान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित उभरती चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की।
अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तुतियां:
– डॉ. स्वराज राज (पूर्व प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग): पंजाब के प्रवास में उम्र और लिंग संबंधी चिंताएं।
– स. जसबीर मंड (रोपड़ के प्रमुख लेखक और विचारक): किसानों और मजदूरों की चिंताएं।
– डॉ. विनोद कुमार (जगत गुरु नानक देव पंजाब राज्य मुक्त विश्वविद्यालय, पटियाला): साहित्य और प्रवास के मुद्दे।
– डॉ. गुरमीत सिंह (पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला): पंजाबी कविता में परिलक्षित प्रवास संबंधी चिंताएं।
– शोधार्थी मनप्रीत कौर: पंजाबी प्रवास में वापसी की संभावनाएं और चुनौतियां।
समापन समारोह सत्रों का सुचारू संचालन पंजाबी विभाग की डॉ. हरप्रीत कौर और डॉ. चरणजीत कौर ने किया। इस आयोजन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब धार्मिक अध्ययन विभाग के प्रमुख डॉ. हरदेव सिंह, शिक्षा विभाग की डॉ. हरनीत बिलिंग, राजनीति विज्ञान विभाग की डॉ. रमनदीप कौर, खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. रुपिंदर पाल सिंह, जिला भाषा अधिकारी स. रंजीत सिंह सहित संकाय सदस्यों और छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में पंजाबी विभाग के प्रमुख डॉ. सिकंदर सिंह ने सम्मेलन की सफलता में योगदान देने वाले सभी विद्वानों, शिक्षकों और छात्रों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन किया।
