इज़राइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को जो गहरी चोट लगी है, पूरी दुनिया अभी तक उसके गंभीर आर्थिक प्रभावों से जूझ रही है। महंगाई, महंगे तेल और आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply chains) के टूटने की इस लगातार चल रही मार के बीच, अब एक और अहम समुद्री मार्ग के बंद होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
यह नया संकट “बाब अल-मंडेब” जलडमरूमध्य (Bab al-Mandab Strait) पर मंडरा रहा है। बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य—जिसका अरबी में अनुवाद “आंसुओं का दरवाज़ा” (Gate of Tears) है—हिंद महासागर और अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) को लाल सागर (Red Sea) और स्वेज़ नहर (Suez Canal) से जोड़ने वाला एक अहम समुद्री मार्ग है। यह असल में यूरोप-एशिया समुद्री व्यापार का दक्षिणी दरवाज़ा है।

1. रणनीतिक महत्व
• भौगोलिक तंगी (Geographical bottleneck): अरब प्रायद्वीप (Peninsula–धरती का वह हिस्सा जिसके तीन तरफ पानी/समुद्र हो) पर स्थित यमन और अफ़्रीकी महाद्वीप के देशों (जिबूती और इरिट्रिया) के बीच स्थित यह मार्ग अपने सबसे तंग हिस्से में महज़ 30 किलोमीटर (लगभग 18 मील) चौड़ा है। स्वेज़ नहर के ज़रिए यूरोप जाने वाले इस रणनीतिक रास्ते में समुद्री जहाज़ों को सिर्फ़ 2 मील चौड़े आवाजाही मार्गों (Transit channels) में से ही गुज़रना पड़ता है, जिस कारण भौगोलिक और भौतिक दृष्टि से यहाँ किसी भी सैन्य रुकावट या नाकेबंदी का खतरा ज़्यादा गंभीर हो जाता है।
• विश्वव्यापी मुख्य मार्ग (Global chokepoint): यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नौवहन रास्ता (Shipping route) है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global supply chain) के एक ढांचागत स्तंभ (Structural pillar) के रूप में काम करता है। दुनिया के समुद्री व्यापार का लगभग 12%—जिसमें कृषि वस्तुएं, तैयार उत्पाद और ऊर्जा वस्तुएं शामिल हैं—अफ़्रीकी महाद्वीप का चक्कर लगाने से बचने के लिए इसी रास्ते से गुज़रता है।
2. रोज़ाना मार्ग के मूल आंकड़े
2023 के अंत में समुद्री सुरक्षा खतरों के बढ़ने से पहले, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुज़रने वाला ट्रैफ़िक बहुत ज़्यादा था।
• संकट से पहले की मात्रा (2023): सालाना लगभग 26,000 समुद्री जहाज़ इस रास्ते से गुज़रते थे, जिनकी औसतन संख्या लगभग 71 जहाज़ प्रतिदिन थी।
• मौजूदा मात्रा (2025-2026): यमन स्थित हूती (Houthi) समूहों द्वारा किए गए हमलों के कारण, समुद्री आवाजाही में भारी गिरावट आई है। स्वेज़ नहर प्राधिकरण (Suez Canal Authority) के ताज़ा आंकड़े दर्शाते हैं कि सालाना मार्ग घटकर लगभग 12,700 जहाज़ रह गए हैं, जिससे रोज़ाना का औसत घटकर लगभग 34 जहाज़ प्रतिदिन रह गया है क्योंकि संचालक (Operators) सुरक्षित और लंबे रास्तों का चुनाव कर रहे हैं।
3. वैश्विक तेल आपूर्ति की निर्भरता
“मलक्का जलडमरूमध्य” (Strait of Malacca) और “होर्मुज़ जलडमरूमध्य” (Strait of Hormuz) के बाद यह आंसुओं का दरवाज़ा (बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य) दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा समुद्री तेल मार्ग है।
• मात्रा: बाज़ार की स्थितियों पर निर्भर करते हुए, कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के 42 लाख से 62 लाख बैरल प्रतिदिन इस रास्ते से गुज़रते हैं।
• प्रतिशतता: यह विश्वव्यापी समुद्री तेल व्यापार का लगभग 10% से 12% बनता है, इसके साथ ही विश्व की लगभग 10% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की ढुलाई भी इसी रास्ते से होती है।
4. प्रमुख निर्यातक और वस्तुएं
बाब अल-मंडेब (आंसुओं का दरवाज़ा) विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के लिए दो-तरफा रास्ते के रूप में काम करता है।
• पश्चिम एशिया: इस क्षेत्र के प्रमुख निर्यातकों में सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर शामिल हैं। ये देश मुख्य रूप से कच्चा तेल, रिफाइंड पेट्रोलियम और एलएनजी इस रास्ते से निर्यात करते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि सऊदी अरब फ़ारस की खाड़ी (Persian Gulf) के रास्तों में अस्थिरता होने पर लाल सागर के अपने बंदरगाह (यानबू) से तेल निर्यात करने के लिए अपनी पूर्व-से-पश्चिम तेल-पाइपलाइन (Petroline) के ज़रिए इस रास्ते पर बहुत ज़्यादा निर्भर करता है।
• एशियाई क्षेत्र: दूसरी ओर, चीन, भारत, दक्षिण कोरिया और जापान प्रमुख निर्यातक हैं। ये देश यूरोपीय बाज़ारों की ओर जाने वाले कंटेनरों वाले माल, जैसे कि तैयार वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, और वाहनों के पुर्ज़ों आदि के निर्यात के लिए बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं।
5. प्रमुख आयातक और व्यापारिक निर्भरता
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के माध्यम से आने वाले माल के मुख्य उपभोक्ता यूरोपीय और एशियाई देश हैं।
• यूरोप (प्रमुख लाभार्थी): यूरोप मुख्य रूप से मध्य पूर्व से ऊर्जा (कच्चा तेल और एलएनजी) और एशिया से तैयार वस्तुएं प्राप्त करता है। यूरोप लाल सागर में होने वाली किसी भी रुकावट का सीधा शिकार होता है। यूरोपीय संघ (European Union) के कुल कच्चे तेल के आयात का लगभग 35% इसी रास्ते से आता है। इसके अलावा, यूरोप-एशिया का लगभग 40% कंटेनर व्यापार बाब अल-मंडेब से गुज़रता है।
• एशिया (चीन, भारत): एशियाई देश यूरोपीय औद्योगिक मशीनरी, रसायन, कृषि उत्पाद और रूसी कच्चा तेल (खासकर 2022 के बाद) प्राप्त करते हैं। हालाँकि एशिया अपने मध्य पूर्वी तेल का बड़ा हिस्सा होर्मुज़ और मलक्का जलडमरूमध्य के माध्यम से मंगवाता है, लेकिन पश्चिमी बाज़ारों तक अपनी मुनाफ़े वाली निर्यात पहुँच के लिए यह बाब अल-मंडेब पर निर्भर करता है। यहाँ आने वाली कोई भी रुकावट माल-भाड़े (Freight) की कीमतें बढ़ाकर पूर्वी और दक्षिणी एशिया की निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं को बुरी तरह प्रभावित करती है।
6. ईरान ने आंसुओं के दरवाज़े को बंद करने की चेतावनी क्यों दी है?
28 फ़रवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला कर दिया गया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी, इसके बाद पश्चिम एशिया का व्यापक क्षेत्र ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच चल रहे युद्ध की चपेट में आ गया है। ईरान द्वारा बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण हैं:
• रणनीतिक रोकथाम (Strategic deterrence): बाब अल-मंडेब को बंद करने या इसमें विघ्न डालने की ईरान की चेतावनी एक सोची-समझी रोकथाम रणनीति (Deterrence strategy) है। खुफिया रिपोर्टें दर्शाती हैं कि अमेरिका और इज़राइल ने ईरान की अहम जगहों, खासकर खार्ग द्वीप (Kharg Island – जो ईरान के लगभग 90% तेल निर्यात को संभालता है) पर हमले करने पर विचार किया है।
• ‘दोहरे-मार्ग’ की रणनीति (Dual-chokepoint strategy): तेहरान पहले ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर सीधा सैन्य दबाव बना रहा है। बाब अल-मंडेब के लिए खतरा पैदा करके, ईरान यह संकेत देता है कि उसके संप्रभु क्षेत्र (Sovereign territory) या आर्थिक जीवन-रेखाओं (Economic lifelines) पर किसी भी हमले के परिणामस्वरूप दो-तरफ़ा समुद्री घेराबंदी होगी। यह असाधारण खतरा एक विश्वव्यापी ऊर्जा और आपूर्ति (Energy and logistics) का संकट पैदा करके विरोधियों पर ‘दोगुनी कीमत’ थोपने की रणनीति का हिस्सा है।
7. इसे बंद कैसे किया जा सकता है?
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य ईरान की सीमाओं से 1,200 मील से अधिक दूर है, इसलिए ईरान अपनी नौसेना के विनाशक जहाज़ों (Destroyers) का उपयोग करके यहाँ नाकेबंदी नहीं करेगा। इसके बजाय, विशेषज्ञ एक “असममित युद्ध” (Asymmetric warfare) के मॉडल की ओर इशारा करते हैं:
• प्रॉक्सी का उपयोग (Use of proxies): ईरान यमन में हूती (Houthi) आंदोलनकारियों के माध्यम से अपना प्रभाव इस्तेमाल करता है, जिनका बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पूर्वी तट के साथ-साथ एक बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण है।
• असममित चालें (Asymmetric tactics): एक बहु-स्तरीय असममित रणनीति का उपयोग करके इसे बंद किया जाएगा या भारी रुकावट डाली जाएगी। इसमें तटवर्ती जहाज़-विरोधी बैलिस्टिक मिसाइलें (Anti-ship ballistic missiles), सशस्त्र हवाई और समुद्री ड्रोनों के झुंड (Swarm drones), तैरती समुद्री सुरंगें (Sea mines), और तेज़-हमलावर इंटरसेप्टर नावें (Fast-attack interceptor boats) शामिल हैं। ये तरीके बिना सुरक्षा वाले व्यापारिक जहाज़ों या बीमा कंपनियों के लिए इस रास्ते से गुज़रने को बहुत जोखिम भरा बना सकते हैं।
8. आंसुओं का दरवाज़ा बंद होने के संभावित आर्थिक प्रभाव क्या होंगे?
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य की लगातार नाकेबंदी या भारी रुकावट विश्व व्यापार के स्वरूप पर बड़ा असर डालेगी:
• अफ़्रीका का चक्कर: जहाज़ों को स्वेज़ नहर को छोड़कर “केप ऑफ़ गुड होप” (Cape of Good Hope) के माध्यम से अफ़्रीका का चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इससे आवाजाही के समय में 10 से 15 दिनों की वृद्धि होती है, और सफ़र में खपत होने वाले तेल तथा सफ़र के खर्च में भारी वृद्धि होगी।
• कीमतों में उछाल: एक दोहरी रुकावट (होर्मुज़ और बाब अल-मंडेब की एक ही समय पर नाकेबंदी) बाज़ार में से 30% से अधिक विश्वव्यापी समुद्री तेल को हटा सकती है। जिससे कच्चे तेल की कीमत में बेतहाशा वृद्धि होगी।
• सप्लाई चेन की महंगाई: समुद्री बीमा (Marine insurance) के बढ़ते प्रीमियमों, निर्माण पुर्ज़ों में देरी, और माल-भाड़े (Freight rates) की दरों में वृद्धि दुनिया भर में महंगाई का एक बड़ा झटका देगी। ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं (जैसे कि भारत, पाकिस्तान और तुर्की) को गंभीर और तुरंत वित्तीय तनाव (Financial stress) का सामना करना पड़ेगा।
