इन दिनों ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ या ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ दुनिया भर में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस समुद्री मार्ग की बनावट एक डमरू के आकार की है, जो डमरू की तरह ही किनारों से चौड़ा और बीच में से संकरा है। रणनीतिक नजरिए से यह संकरा मार्ग इतना महत्वपूर्ण है कि इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्ग (chokepoint) माना जाता है।
फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए एक ऐसी जीवन-रेखा है जिसका कोई विकल्प नहीं है।
यहाँ इसकी रणनीतिक अहमियत, व्यापारिक गतिशीलता और मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई है:
बुनियादी आंकड़े: यातायात और वैश्विक आपूर्ति
2026 की शुरुआत में आई गंभीर रुकावटों से पहले, इस जलमार्ग के जरिए बड़े पैमाने पर वैश्विक व्यापार होता था:
• रोजाना जहाजों की आवाजाही: ऐतिहासिक तौर पर इस होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना औसतन 138 से 153 व्यापारिक समुद्री जहाज गुजरते थे।
• तेल की आपूर्ति: 2025 में, औसतन 20 से 20.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद इस जलमार्ग से होकर गुजरते थे।
• वैश्विक हिस्सेदारी: यह मात्रा कुल वैश्विक तेल खपत का लगभग 20% और समुद्री रास्ते से होने वाले कुल तेल व्यापार का लगभग 25% से 27% हिस्सा थी।
• प्राकृतिक गैस: यह मार्ग तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। दुनिया भर के तरलीकृत प्राकृतिक गैस व्यापार का लगभग 20% हिस्सा होर्मुज के जरिए ही होता है। कतर के कुल तरलीकृत प्राकृतिक गैस निर्यात का 93% और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का 96% हिस्सा होर्मुज मार्ग से ही जाता है।

प्रमुख निर्यातक और वस्तुएं
होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी उत्पादकों के लिए प्राथमिक और कई मामलों में एकमात्र समुद्री निकासी रास्ता है। निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में कच्चा तेल, तरल गैस (कंडेनसेट), रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद (जैसे डीजल और एविएशन फ्यूल), तरलीकृत प्राकृतिक गैस, और कृषि में इस्तेमाल होने वाले उर्वरक (जैसे अमोनिया और यूरिया) शामिल हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए कच्चे तेल और तरल गैस का निर्यात करने वाले प्रमुख देश हैं:
• सऊदी अरब: होर्मुज के रास्ते जाने वाले कुल तेल में से लगभग 37.2% (करीब 5.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन) सऊदी अरब से जाता है।
• इराक: इराक की हिस्सेदारी लगभग 22.8% है।
• संयुक्त अरब अमीरात (UAE): इसकी हिस्सेदारी लगभग 12.9% है।
• ईरान और कुवैत: इनकी हिस्सेदारी क्रमशः 10.6% और 10.1% के आसपास है।
प्रमुख आयातक: किसे क्या मिलता है?
एशियाई बाजार इस मार्ग पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, जो होर्मुज के रास्ते गुजरने वाले तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का लगभग 90% हिस्सा आयात करते हैं।
• चीन (होर्मुज तेल प्रवाह का 37.7%): चीन होर्मुज के रास्ते जाने वाले तेल का सबसे बड़ा आयातक है, जिसे लगभग 4.8 से 5.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल मिलता है। यह चीन के कुल तेल आयात का 40% और इसके तरलीकृत प्राकृतिक गैस आयात का 30% हिस्सा है।
• भारत (होर्मुज तेल प्रवाह का 14.7%): भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए लगभग 2.1 से 2.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन प्राप्त करने वाली अर्थव्यवस्था है। भारत का लगभग 50% कच्चा तेल और 50% से अधिक तरलीकृत प्राकृतिक गैस होर्मुज से होकर आता है, जो मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आता है। इसके अलावा, भारत की खाद्य सुरक्षा भी एक तरह से इसी मार्ग पर निर्भर है, क्योंकि 75% से अधिक आयातित यूरिया और महत्वपूर्ण कृषि उर्वरक खाड़ी देशों से होर्मुज मार्ग के जरिए ही आते हैं।
• दक्षिण कोरिया (12.0%) और जापान (10.9%): इन दोनों देशों के पास घरेलू ऊर्जा संसाधनों की कमी है और ये अपनी औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं को चलाने के लिए मध्य पूर्वी कच्चे तेल और कतरी तरलीकृत प्राकृतिक गैस पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।
नाकाबंदी के इतिहास पर एक नज़र
ऐतिहासिक तौर पर ऐसा बहुत कम हुआ है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूर्ण रूप से और लंबे समय के लिए बंद हुआ हो, हालांकि यह कई बार तनाव का केंद्र जरूर रहा है।
• 1980 के दशक का टैंकर युद्ध: ईरान-इराक युद्ध के दौरान, दोनों पक्षों ने व्यापारिक जहाजों पर हमले किए, लेकिन जलमार्ग आवाजाही के लिए खुला रहा।
• 2011-2012 और 2018-2019: अमेरिकी प्रतिबंधों के बढ़ने के दौरान, ईरान ने बार-बार होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी। इस दौरान तेल टैंकरों पर कई हमले और जहाजों को कब्जे में लेने (जैसे ब्रिटिश झंडे वाले स्टेना इम्पेरो) की घटनाएं देखी गईं, लेकिन कभी भी पूर्ण नाकाबंदी लागू नहीं की गई।
• फरवरी 2026 (अभ्यास): मौजूदा संकट के शुरू होने से थोड़ी देर पहले ईरान ने नौसैनिक अभ्यासों के लिए होर्मुज मार्ग के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था।
मौजूदा स्थिति (मार्च 2026)
फरवरी 2026 के अंत में ईरान पर संयुक्त अमेरिकी और इजरायली सैन्य हमलों के बाद भू-राजनीतिक परिदृश्य बहुत बड़े स्तर पर बदल गया, जिससे 2026 के ईरान युद्ध की शुरुआत हुई। होर्मुज जलडमरूमध्य इससे बहुत बड़े स्तर पर प्रभावित हुआ है क्योंकि ईरान ने इस मार्ग की नाकाबंदी की रणनीति लागू करके इसे रोक दिया है। हालिया बयानों में ईरान ने कहा है कि यह मार्ग ईरान के दुश्मनों के लिए बंद है।
• आवाजाही में भारी गिरावट: रोजाना की आवाजाही 138 जहाजों से काफी घट गई है। कई रिपोर्ट्स का कहना है कि आवाजाही घटकर इकाई के आंकड़ों (single digits) तक आ गई है, और कई बार दिन में 5 जहाजों से भी नीचे चली जाती है। चीनी, भारतीय और पश्चिमी जहाजों को ओमान की खाड़ी या फारस की खाड़ी में खड़े रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
• हमले और बीमा: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की चेतावनियों के बाद, कई व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन और गोला-बारूद से हमले किए गए। नतीजतन, समुद्री बीमा कंपनियों ने ‘वॉर-रिस्क कवरेज’ (युद्ध-जोखिम बीमा) को हटा दिया, जिससे यह रास्ता शिपिंग कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से बहुत महंगा बन गया। प्रमुख ऊर्जा कंपनियों ने अपने खाड़ी समझौतों पर ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure – अप्रत्याशित परिस्थिति) लागू कर दिया है।
इसे फिर से खोलना मुश्किल क्यों है?
यदि इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है, तो भौगोलिक और परिचालन संबंधी जमीनी हकीकतों के मद्देनजर इसे जबरदस्ती फिर से खोलना बहुत मुश्किल है:
• भूगोल: यह जलमार्ग अपने सबसे संकरे बिंदु पर सिर्फ 21 मील (33 किलोमीटर) चौड़ा है। लेकिन यहाँ पानी की गहराई एक समान नहीं है, इसलिए समुद्री जहाजों के दोतरफा आवागमन के लिए प्रत्येक दिशा में सिर्फ 2 मील (लगभग 3.2 किलोमीटर) चौड़े रास्ते ही हैं। इस कारण बड़े और धीमी गति से चलने वाले टैंकरों को एक पहले से तय, संकरे रास्ते से ही गुजरना पड़ता है।
• असममित (Asymmetric) युद्ध: मार्ग के लिए सीमित जगह होने के कारण व्यापारिक जहाजों को ईरानी तट से तैनात की जाने वाली एंटी-शिप मिसाइलों, तेज हमला करने वाली ड्रोन नौकाओं, और समुद्री बारूदी सुरंगों का बहुत ज्यादा खतरा रहता है।
• वैकल्पिक रास्तों की कमी: सऊदी अरब के जरिए लाल सागर तक या संयुक्त अरब अमीरात के जरिए ओमान की खाड़ी तक मौजूद पाइपलाइनों की क्षमता अधिकतम 3.5 से 5.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। इस वजह से लगभग 14 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल बिना किसी वैकल्पिक निकासी रास्ते के फंसा रह जाता है।
अमेरिका द्वारा इसे फिर से खोलने की कोशिशों के खतरे
होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने और फिर से खोलने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किए जाने वाले किसी भी सीधे सैन्य हस्तक्षेप में गंभीर रणनीतिक खतरे शामिल हैं:
• क्षेत्रीय तनाव में वृद्धि: ईरानी तटीय रक्षा और समुद्री क्षमता को नष्ट करने के लिए अमेरिका की सीधी सैन्य कार्रवाई के एक लंबी और बड़े स्तर की जंग में बदलने का खतरा होगा, जिसमें पड़ोसी खाड़ी देशों के शामिल होने और क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे के युद्ध में नष्ट होने की संभावना है।
• नौसेना के लिए चुनौतियां: फारस की खाड़ी के संकरे और कम गहरे पानी में काम कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों को एंटी-एक्सेस/एरिया-डिनायल (A2/AD) नेटवर्क का सामना करना पड़ेगा, जिसमें उन्नत मिसाइल बैटरियां और बारूदी सुरंगों वाले क्षेत्र शामिल हैं।
• आर्थिक झटका: सीधे तौर पर जहाजों के मार्ग में होने वाला सैन्य टकराव यह सुनिश्चित करेगा कि व्यापारिक जहाज अनिश्चित काल के लिए दूर रहें। इससे वैश्विक ऊर्जा की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाएंगी, सप्लाई चेन में भारी रुकावटें आएंगी, उर्वरकों की कमी के कारण भोजन की कीमतें बढ़ेंगी, और वैश्विक अर्थव्यवस्था संभावित तौर पर एक गंभीर मंदी की ओर धकेल दी जाएगी।
निष्कर्ष
संक्षेप में कहा जाए तो, होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता की रीढ़ की हड्डी है। मौजूदा तनाव और युद्ध के कारण इस मार्ग का बंद होना न सिर्फ तेल और गैस की विश्वव्यापी आपूर्ति को ठप कर रहा है, बल्कि पूरी दुनिया को एक भयानक आर्थिक मंदी की ओर भी धकेल रहा है। इसकी संकरी भौगोलिक बनावट और सैन्य खतरों के कारण इसे ताकत के जोर पर फिर से खोलना बहुत मुश्किल और जोखिम भरा है, जिससे क्षेत्रीय टकराव के और बढ़ने और दुनिया भर में महंगाई के चरम पर पहुंचने का गंभीर खतरा बना हुआ है।
