फ्रैंकफर्ट, जर्मनी — सिख संघर्ष में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करते हुए, पुस्तक “कौरनामा” के तीसरे खंड का फ्रैंकफर्ट के गुरुद्वारा सिख सेंटर में एक विशाल पंथक समागम के दौरान आधिकारिक रूप से विमोचन किया गया। ‘धर्मी सिख बीबियों’ (श्रद्धालु सिख महिलाओं) के जीवन की कहानियों और शहादत का दस्तावेजीकरण करने वाली इस पुस्तक को समुदाय की सक्रिय महिलाओं द्वारा लॉन्च किया गया। यह कार्यक्रम शहीद भाई परमजीत सिंह पंजवड़ की तीसरी बरसी मनाने के लिए आयोजित किया गया था।

“कौरनामा” का विमोचन इस समारोह का मुख्य केंद्र रहा। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सिख राष्ट्र का इतिहास अपनी बेटियों के महान बलिदानों को स्वीकार किए बिना अधूरा है। उन्होंने बताया कि यह तीसरा खंड उन महिलाओं की गौरवशाली विरासत को संरक्षित करने के मिशन को आगे बढ़ाता है, जो अपने विश्वास और पंथ के प्रति प्रतिबद्ध ता पर मजबूती से अडिग रहीं।

पंजवाड़ परिवार और सिख फेडरेशन जर्मनी द्वारा आयोजित इस समागम में दुनिया भर से सिख प्रवासियों (डायस्पोरा) के एक बड़े वर्ग ने भाग लिया। श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के उपरांत, ज्ञानी मिल्खा सिंह मौजी के ढाडी जत्थे ने वीर रस की वारें (बहादुरी के लोकगीत) गाईं, जिन्होंने सिख शहीदों की ऐतिहासिक बहादुरी को वर्तमान संघर्ष के साथ जोड़ा।

सिख फेडरेशन जर्मनी के भाई गुरदयाल सिंह लाली ने मंच का संचालन किया। सभा को कनाडा से आए वरिष्ठ नेता भाई मनिंदर सिंह, यूके से भाई कुलदीप सिंह चहेड़ू और फ्रांस से भाई रघबीर सिंह कोहाड़ ने संबोधित किया। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य प्रमुख हस्तियों में भाई गुरमीत सिंह खूड़ियां, भाई रेशम सिंह बब्बर, भाई गुरचरण सिंह गुराया, भाई मनजोत सिंह भूरा, भाई गुरदीप सिंह परदेसी, करनपाल सिंह हेरां, भाई हीरा सिंह मत्तेवाल, भाई जगतार सिंह माहल और भाई दलजीत सिंह शामिल थे।

इस दौरान, सामूहिक नेतृत्व ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा, “हम उन सभी शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं जिन्होंने सिख संघर्ष और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। हम पूरी निष्ठा से यह प्रतिज्ञा करते हैं कि लक्ष्य प्राप्त होने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।”
इस सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया गया, जिसमें संगत ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा जारी निर्देशों का पूर्ण समर्थन किया। इस प्रस्ताव में 2025 तक केंद्रीय सिख अजायब घर (Central Sikh Museum) में शहीद भाई परमजीत सिंह पंजवड़, शहीद भाई हरदीप सिंह निज्जर और भाई गजिंदर सिंह के चित्र स्थापित करने की समुदाय की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

यह कार्यक्रम शहीदों के परिवारों को सम्मानित करने का एक मंच भी बना। विशेष रूप से भाई पंजवाड़ के पुत्र शाहबाज़ सिंह पंजवड़ और उनके भतीजे हरिंदर सिंह पंजवड़ को सम्मानित किया गया। समागम में कई अन्य सामुदायिक प्रतिनिधियों ने भी अपनी हाजिरी दर्ज कराई, जिनमें भाई कश्मीर सिंह (यूके), भाई कृपाल सिंह, भाई सतपाल सिंह पड्डा, भाई अमरजीत सिंह मंगूपुर, भाई बलकार सिंह देओल, भाई कश्मीर सिंह गोसल, भाई सुखदेव सिंह हेरां, भाई कुलवंत सिंह, भाई गुरदयाल सिंह ढकनसू, भाई पृथीपाल सिंह और भाई सुखदेव सिंह खालू शामिल थे।

