साका नकोदर के शहीदों की याद में विशेष संगोष्ठी आयोजित

चंडीगढ़ के श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन में साका नकोदर (1986) के शहीदों की स्मृति में मिसल सतलुज संगठन द्वारा एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें मानवाधिकार हनन और लंबित न्याय के मुद्दे पर गहराई से चर्चा हुई।

Seminar in memory of the martyrs of Saka Nakodar 1986

चंडीगढ़: साका नकोदर (4 फ़रवरी 1986) के शहीदों की याद में आज श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन, सेक्टर-28, चंडीगढ़ में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय “साका नकोदर: मानवाधिकारों का हनन” था। इस महत्वपूर्ण अवसर पर कानूनविदों, छात्रों और बुद्धिजीवियों ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस कार्यक्रम का आयोजन मिसल सतलुज संगठन द्वारा किया गया।

प्रमुख वक्ता और उनके विचार संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व न्यायमूर्ति रंजीत सिंह (अध्यक्ष, पंजाब मानवाधिकार संगठन), अधिवक्ता राजविंदर सिंह बैंस, जसपाल सिंह सिद्धू, राजविंदर सिंह राही, प्रो. जगमोहन सिंह, अधिवक्ता जसपाल सिंह मंझपुर, अधिवक्ता पूनम वालिया, शाम सिंह (अध्यक्ष, केंद्रीय श्री गुरु सिंह सभा), डॉ. खुशहाल सिंह (सचिव, केंद्रीय श्री गुरु सिंह सभा) और जगजीत सिंह रतनगढ़ ने अपने विचार साझा किए। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि 4 फ़रवरी 1986 को नकोदर में एक शांतिपूर्ण काफिले पर हुई गोलीबारी मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन थी और इस मामले में पीड़ितों को न्याय मिलना अभी भी बाकी है।

भाई रविंदर सिंह लित्तरां के पिता बापू बलदेव सिंह जी Bhai-Ravinder-Singh-Litrans-father-Bapu-Baldev-Singh
भाई रविंदर सिंह लित्तरां के पिता बापू बलदेव सिंह जी

न्याय की मांग और सरकारी लापरवाही इस भावुक अवसर पर शहीद भाई रविंदर सिंह लितरां के पिता बापू बलदेव सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को याद रखना और नई पीढ़ी को सच्चाई से अवगत कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कुछ मुख्य बिंदु साझा किए:

  • घटना की जांच के लिए तत्कालीन पंजाब सरकार द्वारा न्यायमूर्ति गुरनाम सिंह आयोग का गठन किया गया था।

  • इस आयोग की रिपोर्ट का एक हिस्सा पिछले साल पंजाब विधानसभा में पेश किया गया था, लेकिन दूसरा हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब है।

  • चुनावों से पहले वर्तमान सरकार ने साका नकोदर मामले की गहन जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देने का वादा किया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

  • उन्होंने यह भी याद दिलाया कि साका नकोदर और बरगाड़ी में हुई बेअदबी की घटनाओं के समय शिरोमणि अकाली दल की ही सत्ता थी।

साका नकोदर का ऐतिहासिक संदर्भ उल्लेखनीय है कि 4 फ़रवरी 1986 को नकोदर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के विरोध में एकत्र हुई निहत्थी सिख संगत पर पंजाब पुलिस द्वारा भारी गोलीबारी की गई थी। इस घटना के दौरान रविंदर सिंह लितरां, हरमिंदर सिंह चलूपुर, बलधीर सिंह रामगढ़ और झिलमण सिंह गोरसियां ने शहादत प्राप्त की थी।

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अधिवक्ता (एडवोकेट) जसपाल सिंह मंझपुर

समापन और भविष्य का संकल्प संगोष्ठी के अंत में मिसल सतलुज के अध्यक्ष अजेपाल सिंह बराड़ ने सभी वक्ताओं और श्रोताओं का धन्यवाद किया। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि शहीदों के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष निरंतर जारी रखा जाएगा।

इस अवसर पर मिसल सतलुज के युवा नेता यादविंदर सिंह यादू अलाल, अमरिंदर सिंह, ऐतपाल सिंह बराड़, मनदीप सिंह, हरविंदर सिंह, अधिवक्ता हरप्रीत सिंह और दुर्लभ सिंह आदि भी मौजूद थे।