रणजीत सिंह एनकाउंटर मामला: कोर्ट ने पुलिस के कॉल रिकॉर्ड, जीपीएस लोकेशन सुरक्षित रखने और मेडिकल जांच के दिए आदेश

मृतक की माता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, गुरदासपुर की एक अदालत ने दूरसंचार कंपनियों और अधिकारियों को रणजीत सिंह एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों के कॉल रिकॉर्ड, जीपीएस लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। एक अधिकारी को लगी गोली की भी मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच की जाएगी।

Ranjit Singh Gurdaspur Police Encounter or Extra Judicial Killing

गुरदासपुर — विवादित रणजीत सिंह एनकाउंटर मामले में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। एक स्थानीय अदालत ने इस मामले में शामिल पुलिस कर्मियों के डिजिटल फुटप्रिंट सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। मृतक रणजीत सिंह की माता सुखजिंदर कौर द्वारा दायर एक औपचारिक शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, अदालत ने कई उच्च पदस्थ और अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों के कॉल विवरण और जीपीएस लोकेशन सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

अदालत के इन निर्देशों की प्रति ‘सिख सियासत न्यूज़’ (SSN) के पास उपलब्ध है।

यह आदेश एक समर्पित कानूनी टीम द्वारा अदालत में दी गई अर्जी के बाद आया है। इस मामले की पैरवी कर रहे वकीलों में भारत के सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अजय मरवाह, सुप्रीम कोर्ट और गुरदासपुर जिला अदालत के एडवोकेट रविदीप बडियाल और गुरदासपुर के एडवोकेट भजनप्रीत सिंह शामिल हैं।

आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, अदालत ने प्रमुख पुलिस अधिकारियों—जिनमें एसएसपी गुरदासपुर, एसएचओ दोरांगला, एसएचओ पुराना शाला, सीआईए इंचार्ज गुरमीत सिंह और मौके पर मौजूद अन्य पुलिस कर्मी शामिल हैं—को निर्देश दिया है कि वे जांच अधिकारी और अपनी संबंधित टेलीकॉम कंपनियों को अपने फोन नंबरों का विवरण दें। इसके अलावा, अदालत ने विशेष रूप से टेलीकॉम ऑपरेटरों को आदेश दिया है कि “इन अधिकारियों की 20 फरवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक की कॉल डिटेल सुरक्षित रखी जाए।”

कॉल लॉग के अलावा, अधिकारियों को निर्दिष्ट समय सीमा के लिए जीपीएस (GPS) लोकेशन भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। अदालत के आदेश में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि “घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज, यदि कोई हों, तो उन्हें सुरक्षित रखा जाए और जांच का हिस्सा बनाया जाए।” इसी तरह, घटनाओं के क्रम को स्थापित करने के लिए मृतक रणजीत सिंह के कॉल विवरण और लोकेशन को भी सुरक्षित रखने के लिए कहा गया है।

एनकाउंटर की प्रकृति पर सवाल उठाते हुए, माननीय अदालत ने एक पुलिस अधिकारी को लगी चोटों की गहन मेडिकल जांच के भी आदेश दिए हैं। गुरदासपुर के सीनियर मेडिकल ऑफिसर (SMO) को निर्देश दिया गया है कि वे सीआईए इंचार्ज गुरमीत सिंह, जिन्हें मुठभेड़ के दौरान आधिकारिक तौर पर घायल दिखाया गया है, की मेडिकल जांच के लिए तीन डॉक्टरों के एक बोर्ड का गठन करें।

बयान में कहा गया है कि मेडिकल बोर्ड को अपनी विस्तृत रिपोर्ट इलाका मजिस्ट्रेट को सौंपनी होगी। विशेष रूप से, बोर्ड को अधिकारी की बांह पर लगे गोली के घाव की जांच करने का काम सौंपा गया है ताकि यह “स्पष्ट किया जा सके कि उसकी बांह पर गोली खुद लगी है या मारी गई है।”


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