गुरदासपुर एनकाउंटर: पंजाब पुलिस की कहानी पर उठे कड़े सवाल, सीबीआई जांच की मांग तेज

गुरदासपुर में 19 वर्षीय रणजीत सिंह के कथित पुलिस एनकाउंटर ने पंजाब में एक बड़े राजनीतिक और मानवाधिकार विवाद को जन्म दे दिया है। पुलिस और मृतक के परिवार के बयानों में भारी विरोधाभास के बीच, विपक्षी दल और नागरिक अधिकार समूह इस मामले की स्वतंत्र सीबीआई (CBI) जांच की मांग कर रहे हैं।

Gurdaspur Police Encounter under question, CBI inquiry demand rising

गुरदासपुर/ चंडीगढ़ — 19 वर्षीय रणजीत सिंह की तड़के हुए कथित पुलिस एनकाउंटर (मुठभेड़) में हुई मौत ने पंजाब में एक बड़े राजनीतिक विवाद और मानवाधिकार के मुद्दे का रूप ले लिया है। राज्य की पुलिस और मृतक के परिवार के बयानों में भारी विरोधाभास है। इसे देखते हुए विपक्षी नेताओं और नागरिक अधिकार समूहों ने सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

पुलिस का क्या कहना है?

पंजाब पुलिस का दावा है कि यह एनकाउंटर 22 फरवरी को आधियाँ (Adhian) बॉर्डर चेकपोस्ट पर दो पुलिसकर्मियों— एएसआई गुरनाम सिंह और होमगार्ड अशोक कुमार— की हत्या के बाद चलाए गए तलाशी अभियान का नतीजा था। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का आरोप है कि रणजीत सिंह और उसके दो साथियों को पाकिस्तान स्थित आईएसआई (ISI) हैंडलर्स ने पैसों का लालच देकर इस घटना को अंजाम देने के लिए उकसाया था।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद जब रणजीत सिंह को हत्या का हथियार बरामद करने के लिए ले जाया जा रहा था, तब घने कोहरे में उनकी गाड़ी पलट गई। दावा है कि सुबह करीब 3 बजे रणजीत सिंह वहां से भाग निकला और तीन घंटे बाद सुबह 6 बजे पुराना शाला के पास उसे एक मोटरसाइकिल पर देखा गया। पुलिस के अनुसार, इसके बाद हुई गोलीबारी में रणजीत सिंह की मौत हो गई और सीआईए (CIA) का एक इंस्पेक्टर घायल हो गया।

परिवार के आरोप और शव लेने से इनकार

पुलिस के इस घटनाक्रम का रणजीत सिंह के परिवार और स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने तब तक किशोर का शव लेने से इनकार कर दिया है जब तक कि इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज नहीं किया जाता।

Ranjit Singh Gurdaspur Police Encounter or Extra Judicial Killing
मृतक रणजीत सिंह की एक पुरानी तस्वीर

रणजीत सिंह की मां, सुखविंदर कौर ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि पुलिस उनके बेटे को मंगलवार दोपहर को पूछताछ के लिए शांतिपूर्वक घर से ले गई थी। परिवार पुलिस की टाइमलाइन (घटनाक्रम) की व्यवहार्यता पर सवाल उठा रहा है। उनका मुख्य सवाल यह है कि आधी रात को पुलिस हिरासत से भागने के कुछ ही घंटों के भीतर, एक 19 वर्षीय भगोड़ा मोटरसाइकिल और लोड की गई बंदूक का इंतजाम कैसे कर सकता है।

मिसल सतलुज की गृह मंत्रालय से अपील

जवाबदेही की मांग करने वालों की आवाज में अपनी आवाज मिलाते हुए, मिसल सतलुज के अध्यक्ष अजयपाल सिंह बराड़ ने केंद्रीय गृह मंत्री को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर रणजीत सिंह की इस कथित गैर-न्यायिक हत्या (extrajudicial killing) की समयबद्ध सीबीआई जांच की मांग की है। सिख सियासत न्यूज़ के पास उपलब्ध इस पत्र की प्रति में कहा गया है कि गुरदासपुर की घटना ने व्यापक भय पैदा कर दिया है और यह 1982 से 1995 के बीच के उस काले दौर की याद दिलाता है, जब हजारों सिख युवाओं को फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया था।

मानवाधिकार रक्षक दिवंगत जसवंत सिंह खालरा (जिन्होंने पिछले अत्याचारों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी) की विरासत का हवाला देते हुए, पत्र में निर्दोष युवाओं के लिए खड़े होने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। मार्च में गृह मंत्री के प्रस्तावित पंजाब दौरे के मद्देनजर, मिसल सतलुज ने उनसे सिख समुदाय को सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा का आश्वासन देने का आग्रह किया है।

बढ़ता राजनीतिक विरोध और सवाल

पुलिस की कहानी में दिख रही कथित खामियों ने विभिन्न राजनीतिक दलों और मानवाधिकार संगठनों को एकजुट कर दिया है:

विश्वसनीयता का संकट (Credibility Deficit): द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर राज्य पुलिस में “विश्वसनीयता के संकट” का हवाला दिया है और जांच तुरंत एक केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का आग्रह किया है।

विपक्षी नेताओं का परिवार से दौरा: द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा सहित कई नेताओं ने परिवार से मुलाकात कर एकजुटता व्यक्त की है। सुखपाल सिंह खैरा ने पुलिस के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर लड़का दोषी होता, तो वह गिरफ्तारी का इंतजार करते हुए शांति से घर पर नहीं बैठा होता।

मानवाधिकार समूहों की न्यायिक जांच की मांग: जस्टिस रणजीत सिंह (सेवानिवृत्त) के नेतृत्व वाले पंजाब मानवाधिकार संगठन (PHRO) ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन करार दिया है और एक न्यायिक आयोग द्वारा गहन जांच की मांग की है।

सिख संगठनों की चेतावनी: दल खालसा और छात्र संगठन सथ (Sath) के नेताओं ने भी परिवार से मुलाकात की और कहा कि पंजाब 1980 के दशक से एक ‘पुलिस स्टेट’ बना हुआ है। उन्होंने कथित पुलिस एनकाउंटर को गैर-न्यायिक हत्या करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

पंच प्रधानी जत्था की पूर्व चेतावनी:  पंच प्रधानी जत्था ने हाल ही में एक बयान जारी कर चेतावनी दी थी कि पंजाब में अराजक माहौल बनाना भारतीय राज्य की एक सोची-समझी नीति है। जत्थे ने आशंका जताई थी कि एजेंसियां इस स्थिति का फायदा उठाकर पंजाब में सिख और किसान नेतृत्व को निशाना बना सकती हैं।