नवांशहर की विशेष यूएपीए अदालत का बड़ा फैसला: 2017 के मुकंदपुर केस में 7 बरी

नवांशहर की एक विशेष यूएपीए अदालत ने करीब नौ साल पुराने एक मामले में अपना अहम फैसला सुनाते हुए सात व्यक्तियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के सभी कठोर आरोपों से बरी कर दिया है। यह मामला 2017 में मुकंदपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।

Nawanshehr UAPA Court acquitted

नवांशहर — नवांशहर की एक विशेष यूएपीए (UAPA) अदालत ने लगभग नौ साल पुराने एक मामले में अपना फैसला सुनाया है, जिसमें सात व्यक्तियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत लगाए गए सभी गंभीर आरोपों से बरी कर दिया गया है।

यह फैसला विशेष यूएपीए अदालत के न्यायाधीश हरीश आनंद द्वारा 5 जून 2017 को मुकंदपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर (प्राथमिकी) नंबर 44 के संबंध में सुनाया गया। मूल आरोप आईपीसी की धारा 120-बी, 121 और 121-ए, आर्म्स एक्ट (शस्त्र अधिनियम) की धारा 25 और यूएपीए की धारा 10, 13, 15, 16, 17 और 18 के तहत तय किए गए थे।

आतंक और साजिश के सभी आरोप खारिज

अदालती फैसले के बारे में जानकारी देते हुए, ‘पंजाब लॉयर्स’ के प्रमुख एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर ने बताया कि अदालत ने आतंक और साजिश के सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

एडवोकेट जसपाल मंझपुर ने कहा, “अदालत ने गुरमुख सिंह तलवंडी नाहर, जगमिंदर सिंह उर्फ ​​हरि सिंह करनाल, सतनाम सिंह लखीमपुर खीरी और हरप्रीत सिंह मखनविंडी को सभी धाराओं के तहत लगाए गए सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है।” ये चारों व्यक्ति पहले से ही जमानत पर बाहर थे।

आर्म्स एक्ट में 3 को सजा, आतंकी आरोपों से राहत

अदालत ने बाकी तीन आरोपियों— गुरजीत सिंह घैंट, बलवंत सिंह और जसवंत सिंह को लेकर भी फैसला सुनाया। हालांकि उन्हें आईपीसी (120-बी, 121, 121-ए) और यूएपीए (10, 13, 15, 16, 17, 18) के तहत प्रमुख साजिश और आतंकी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया गया है, लेकिन उन्हें केवल आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दोषी ठहराया गया है।

इस विशिष्ट आरोप के लिए, उन्हें दो साल की कैद और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। वर्तमान में, गुरजीत सिंह घैंट जमानत पर बाहर हैं, जबकि बलवंत सिंह नाभा जेल में और जसवंत सिंह मुक्तसर साहिब जेल में बंद हैं।

एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर द्वारा दी गई जानकारी कुछ गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की लंबी कैद पर भी प्रकाश डालती है। जसवंत सिंह और बलवंत सिंह को अगस्त 2017 में गिरफ्तार किया गया था और वे इस मामले के लिए हिरासत में ही थे। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने पहले जसवंत सिंह को जमानत देने से इनकार कर दिया था, जबकि अन्य गिरफ्तार व्यक्ति सफलतापूर्वक जमानत हासिल करने में सफल रहे थे। इसके अलावा, बलवंत सिंह को 2019 के ड्रोन आर्म्स-ड्रॉप मामले के संबंध में पंजाब की एनआईए अदालत द्वारा 2025 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

पंजाब लॉयर्स द्वारा जारी एक लिखित बयान में बताया गया है कि इस मामले में मूल रूप से नामजद दो अन्य व्यक्तियों— मलकीत सिंह फौजी और मनवीर सिंह डुहरे को अदालत द्वारा आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित कर दिया गया है।