लंदन — सिख फेडरेशन (यूके) ने एक औपचारिक बयान जारी कर वैश्विक सिख समुदाय को निशाना बनाने वाले कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ एक नए अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक अभियान की रूपरेखा पेश की है। सिख सियासत न्यूज़ (SSN) को प्राप्त आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पिछले हफ्ते जिनेवा प्रेस क्लब में ‘बियॉन्ड बॉर्डर्स: इंडियन ट्रांसनेशनल रिप्रेशन अगेंस्ट द सिख डायस्पोरा’ (Beyond Borders: Indian transnational repression against the Sikh diaspora) नामक एक विस्तृत नई रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर लॉन्च की गई।
इस रिपोर्ट का लॉन्च इंटरकांटिनेंटल होटल में आयोजित एक विशेष सुबह के सम्मेलन के बाद किया गया, जिसका शीर्षक था— “भारतीय अंतरराष्ट्रीय दमन का मुकाबला: सिख प्रतिरोध और संयुक्त राष्ट्र”। इन दोनों कार्यक्रमों का संयुक्त आयोजन ‘बाकू इनिशिएटिव ग्रुप’ और ‘सिख फेडरेशन इंटरनेशनल’ द्वारा किया गया था। इसका समय रणनीतिक रूप से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UN Human Rights Council) के 61वें सत्र के साथ मेल खाने के लिए तय किया गया था।

संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी बयान के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के एक प्रतिनिधि ने इस सम्मेलन में भाग लिया। रिपोर्ट की सिफारिशों पर चर्चा करने के लिए OHCHR के साथ आगे की बैठकों की योजना पहले ही तय कर ली गई है, जिसमें मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ से जुड़ी व्यापक नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बड़े पैमाने पर प्रकाश डालते हुए, सिख फेडरेशन (यूके) के प्रमुख कार्यकारी दबिंदरजीत सिंह ने इस मुद्दे पर व्यापक कूटनीतिक दिलचस्पी का उल्लेख किया।
सिंह ने कहा, “सम्मेलन और प्रेस वार्ता से पहले विभिन्न देशों के 25 से अधिक स्थायी मिशनों के साथ बातचीत शुरू की गई, क्योंकि भारतीय अंतरराष्ट्रीय दमन का सीधा असर उनके देशों में रहने वाले सिखों पर पड़ता है।”
विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि इस कूटनीतिक जुड़ाव में “फाइव आइज़” (Five Eyes) खुफिया-साझाकरण राष्ट्रों— संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड— के साथ-साथ जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, इटली, स्विट्जरलैंड और पुर्तगाल जैसे कई यूरोपीय देशों के प्रतिनिधि शामिल थे।
कूटनीतिक गलियारों में “ITR” शब्द को स्थापित करना सिख फेडरेशन इंटरनेशनल द्वारा रेखांकित किया गया एक प्राथमिक उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र और व्यापक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर “इंडियन ट्रांसनेशनल रिप्रेशन (ITR)” या ‘भारतीय अंतरराष्ट्रीय दमन’ शब्द को मजबूती से स्थापित करना है।
सिंह के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया काफी सक्रिय रही है। उन्होंने कहा, “कई स्थायी मिशनों ने संपर्क किया है और सुझाव दिया है कि अंतरराष्ट्रीय दमन (ITR) पर विशेष रूप से केंद्रित एक वर्किंग ग्रुप (कार्य समूह) स्थापित किया जाना चाहिए, जिसे रिपोर्ट की कुछ सिफारिशों को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) का समर्थन प्राप्त हो।”
इस गठबंधन को बनाने के लिए, संगठन ने कई प्रमुख अंतर-सरकारी निकायों के साथ बातचीत शुरू कर दी है, उन्हें वर्किंग ग्रुप में शामिल होने या पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करने के लिए आमंत्रित किया है। इनमें शामिल हैं:
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काउंसिल ऑफ यूरोप की संसदीय सभा (PACE)
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यूरोपीय बाहरी कार्रवाई सेवा (EEAS)
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मानवाधिकार पर यूरोपीय संसद उपसमिति (DROI)
रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें प्रेस बयान में बताया गया है कि यह नई जारी की गई रिपोर्ट सख्त अंतरराष्ट्रीय उपायों की मांग करती है। प्रमुख सिफारिशों में शामिल हैं:
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राज्यों की पारदर्शिता (State Transparency): व्यक्तिगत देशों से यह मांग की गई है कि वे अपनी सीमाओं के भीतर होने वाले अंतरराष्ट्रीय दमन के मामलों के प्रति पारदर्शिता दिखाएं।
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जवाबदेही (Accountability): अंतरराष्ट्रीय दमन को अंजाम देने वाले जिम्मेदारों—चाहे वे भारत में हों या अन्य देशों में काम कर रहे हों—की पूर्ण जवाबदेही तय करने की मांग।
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प्रतिबंध और परिणाम (Sanctions and Consequences): भारत के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों सहित समन्वित कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी परिणाम लागू करने का आग्रह।

