ओटावा — वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन ऑफ कनाडा (डब्ल्यूएसओ) ने कनाडा में भारत के विदेशी हस्तक्षेप को लेकर रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के कमिश्नर माइक डुहेम की हालिया टिप्पणियों पर गहरी निराशा व्यक्त की है। डब्ल्यूएसओ द्वारा 19 मार्च, 2026 को जारी इस प्रेस विज्ञप्ति की एक प्रति वर्तमान में ‘सिख सियासत न्यूज़’ (एसएसएन) के पास उपलब्ध है।
यह पूरा विवाद कमिश्नर डुहेम द्वारा ‘सीटीवी क्वेश्चन पीरियड’ की होस्ट वासी कैपेलोस को दिए गए एक इंटरव्यू के बाद शुरू हुआ। इस इंटरव्यू में डुहेम ने कहा था कि, “उनके सामने मौजूद जानकारी के आधार पर, अब कनाडा में ऐसी कोई गुप्त गतिविधियां या अंतरराष्ट्रीय दमन नहीं हो रहा है जो भारत सरकार से जुड़ा हो।”

सीएसआईएस की रिपोर्ट से विरोधाभास: डब्ल्यूएसओ का तर्क है कि कमिश्नर की यह टिप्पणी केवल सक्रिय आपराधिक जांच की एक संकीर्ण व्याख्या पर आधारित लगती है और यह कनाडा के व्यापक खुफिया और सुरक्षा परिदृश्य को नहीं दर्शाती। संगठन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इसी महीने, कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (सीएसआईएस) ने पुष्टि की थी कि भारत अभी भी कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप और जासूसी के प्रमुख स्रोतों में से एक बना हुआ है।
डब्ल्यूएसओ की प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि डुहेम के ये हालिया बयान 2024 में की गई उनकी अपनी ही टिप्पणियों के बिल्कुल विपरीत हैं। उस समय कमिश्नर ने कहा था कि “भारत सरकार के एजेंट, राजनयिकों और वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों के माध्यम से कनाडाई लोगों की जानकारी इकट्ठा कर रहे थे और उसे भारत सरकार तक पहुंचा रहे थे, जिसके बाद यह जानकारी संगठित अपराध समूहों तक पहुंचती थी।”
संगठन ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री कार्नी की हालिया भारत यात्रा से पहले भी एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी द्वारा विदेशी हस्तक्षेप को कमतर आंकने वाले ऐसे ही दावे किए गए थे। हालांकि, कनाडा के कई निर्वाचित सिख अधिकारियों ने इन दावों को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया था।
“राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ हो रही है राजनीति”: डब्ल्यूएसओ के अध्यक्ष दानिश सिंह ने इस बदलते नैरेटिव (बयानबाजी) की कड़ी निंदा करते हुए अधिकारियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया है।
सिंह ने कहा, “यह देखकर निराशा होती है कि जब प्रधानमंत्री कार्नी आर्थिक संबंधों को बढ़ाने का सक्रिय प्रयास कर रहे हैं, ऐसे समय में हमारी सरकार और अब आरसीएमपी भारत सरकार को बचाने के लिए शब्दों का खेल खेल रहे हैं।”
सिंह ने जोर देकर कहा कि कमिश्नर के इन बयानों से आम कनाडाई लोगों के गुमराह होने की पूरी संभावना है और उन्हें लगेगा कि भारत ने कनाडा में अपनी विदेशी हस्तक्षेप की गतिविधियां बंद कर दी हैं। उन्होंने इस धारणा को “बिल्कुल झूठा” करार दिया।
सिख समुदाय को अब भी मिल रही हैं धमकियां: दानिश सिंह ने आगे कहा, “सिख कनाडाई अभी भी भारतीय राज्य के तत्वों और उनके प्रतिनिधियों से जुड़े डराने-धमकाने, निगरानी और धमकियों का सामना कर रहे हैं। हम हाल की कई घटनाओं से अवगत हैं, जिनमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जहां सिख कार्यकर्ताओं को कनाडाई कानून प्रवर्तन एजेंसियों से ‘ड्यूटी टू वार्न’ (खतरे की चेतावनी) के नोटिस मिले हैं। हमें पता है कि लोगों की निगरानी की जा रही है और उन्हें डराया जा रहा है।”
डब्ल्यूएसओ अध्यक्ष ने अंत में कहा कि वर्तमान बयानबाजी समुदाय की चल रही सुरक्षा चिंताओं को सीधे तौर पर खारिज करती है। उन्होंने कहा, “यह बयानबाजी सिख कनाडाई लोगों के लिए ‘गैसलाइटिंग’ (मानसिक तौर पर भ्रमित करने) जैसी महसूस होती है। यदि हमारी सरकार और कमिश्नर डुहेम का मानना है कि उन्हें नए राजनयिक संबंधों की तलाश में भारत को बचाने के लिए इस तरह की ‘जुबानी कसरत’ का सहारा लेना चाहिए, तो इसकी असली कीमत कानून का शासन और कनाडाई लोगों की सुरक्षा चुकाएगी। विदेशी हस्तक्षेप की वास्तविकता को कम करने या छिपाने का कोई भी प्रयास हमारी संस्थाओं में जनता के विश्वास को कम करता है और कमजोर समुदायों को और भी बड़े जोखिम में डालता है।”
