लंदन: सिख फेडरेशन (यू.के.) ने ब्रिटिश सरकार से आग्रह किया है कि जगतार सिंह जग्गी जौहल को बिना किसी और देरी के औपचारिक रूप से राजनयिक संरक्षण दिया जाए।
सिख फेडरेशन (यू.के.) ने कहा कि जगतार सिंह जग्गी जौहल का मामला कोई सामान्य वाणिज्य-दूतावास संबंधी मामला नहीं है। संगठन के अनुसार, यदि ब्रिटेन राजनयिक संरक्षण लागू करता है तो जगतार सिंह जग्गी जौहल का मामला ब्रिटेन और भारत के बीच औपचारिक रूप से एक राज्य-से-राज्य कानूनी विवाद का रूप ले सकता है।

संगठन ने कहा कि ऐसा कदम उठाने से ब्रिटिश सरकार की ओर से जगतार सिंह जग्गी जौहल के आरोपों को औपचारिक मान्यता मिलेगी। इन आरोपों में यह दावा भी शामिल है कि उनका शुरुआती इकबालिया बयान यातना देकर लिया गया था। सिख फेडरेशन (यू.के.) के अनुसार, इसे ब्रिटिश राज्य को हुई क्षति के रूप में भी माना जा सकता है।
संगठन ने कहा कि इससे ब्रिटिश सरकार को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत के खिलाफ औपचारिक कानूनी उपाय अपनाने का आधार मिल सकता है।
सिख फेडरेशन (यू.के.) ने इस संबंध में नाज़नीन ज़घारी-रैटक्लिफ़ के मामले का भी उल्लेख किया। संगठन ने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 2019 में ईरान में हिरासत के दौरान नाज़नीन ज़घारी-रैटक्लिफ़ को राजनयिक संरक्षण दिया था।

सिख फेडरेशन (यू.के.) में राजनीतिक संपर्कों के मुख्य कार्यकारी दविंदरजीत सिंह ओबीई ने कहा कि जगतार सिंह जग्गी जौहल की सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरों सहित गोपनीय जानकारी पहले ही ब्रिटिश सरकार को दी जा चुकी है।
उन्होंने कहा, “हमने ब्रिटिश सरकार को गोपनीय जानकारी दी है, जिसमें जगतार की सुरक्षा को लेकर जोखिम भी शामिल हैं। यह जानकारी उन्हें राजनयिक संरक्षण देने के लिए मजबूत आधार प्रदान करती है।”
सिख फेडरेशन (यू.के.) ने आगे कहा कि जगतार सिंह जग्गी जौहल को घर वापस लाने के लिए ब्रिटिश सरकार के पास सभी आवश्यक साधन हैं और इस मामले में विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन भी मौजूद है।
संगठन ने कहा कि अब सवाल यह नहीं है कि ब्रिटिश सरकार कार्रवाई कर सकती है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या सरकार के पास ऐसा करने की इच्छा है।
