लिवरपूल, इंग्लैंड (ब्रिटेन): सिख फेडरेशन (यू.के.) ने ब्रिटिश सरकार पर आरोप लगाया है कि सिखों के विरुद्ध होने वाले नफरती अपराधों को नस्लीय या धार्मिक नफरत से जुड़े अपराधों के सामान्य आँकड़ों में शामिल किया जा रहा है, जिसके कारण सिख समुदाय के विरुद्ध होने वाले अपराधों की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पा रही है।
लिवरपूल में लेबर पार्टी के सम्मेलन के दौरान नस्लवाद के विरुद्ध कार्य करने वाले संगठन ‘स्टैंड अप टू रेसिज्म’ की ओर से आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए सिख फेडरेशन (यू.के.) के मुख्य कार्यकारी (प्रशासन) कुलदीप सिंह ने कहा कि कई गंभीर घटनाओं ने पुलिस, अभियोजन और न्याय व्यवस्था की विफलताओं को उजागर किया है।
उन्होंने कहा, “यदि आप सिखों के विरुद्ध नफरत को पहचान ही नहीं सकते, तो आप उससे निपट भी नहीं सकते। सरकार को आँकड़ों में इस समस्या को छिपाना बंद करके इसके वास्तविक स्तर का सामना करना चाहिए।”
पश्चिमी मध्य इंग्लैंड की तीन गंभीर घटनाओं का उल्लेख
कुलदीप सिंह ने पश्चिमी मध्य इंग्लैंड में हुई तीन गंभीर घटनाओं का उल्लेख किया। इनमें वुल्वरहैम्पटन में दो बुजुर्ग सिख टैक्सी चालकों पर हमला, ओल्डबरी में एक युवा सिख महिला के साथ नस्लीय नफरत से प्रेरित बलात्कार और वॉल्सॉल में एक युवा सिख महिला के साथ धार्मिक नफरत से प्रेरित बलात्कार की घटनाएँ शामिल हैं।
वुल्वरहैम्पटन में दो बुजुर्ग सिख टैक्सी चालकों पर हमला
अगस्त 2025 में वुल्वरहैम्पटन में दो बुजुर्ग सिख टैक्सी चालकों पर हमला किया गया था। घटनास्थल से तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किए जाने तथा प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद आरोपियों के विरुद्ध जनवरी 2026 तक आरोप तय नहीं किए गए। अब इस मामले की सुनवाई सितंबर 2029 में निर्धारित की गई है।

इस मामले पर कुलदीप सिंह ने कहा कि दो बुजुर्ग सिख व्यक्तियों पर हमला हुआ, संदिग्धों को घटनास्थल से गिरफ्तार किया गया और वीडियो साक्ष्य भी मौजूद थे, लेकिन इसके बावजूद पीड़ितों को मुकदमे की सुनवाई के लिए चार वर्ष से अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि यह सिखों के विरुद्ध नफरती अपराधों को दी जा रही प्राथमिकता के बारे में अत्यंत चिंताजनक संदेश देता है।
ओल्डबरी में युवा सिख महिला के साथ बलात्कार
सितंबर 2025 में ओल्डबरी में काम पर जा रही एक युवा सिख महिला पर हमला करके उसके साथ बलात्कार किया गया था। पुलिस ने इस घटना को नस्लीय नफरत से प्रेरित अपराध बताते हुए प्रत्यक्षदर्शियों से सामने आने की अपील की थी।
इस मामले में बाद में क्राइमस्टॉपर्स की ओर से 20,000 पाउंड का इनाम भी घोषित किया गया, जबकि सिख समुदाय ने भी अपने स्तर पर अभियान चलाया।
कुलदीप सिंह ने कहा कि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान नहीं हो सकी।
वॉल्सॉल में सिख महिला के साथ बलात्कार के दोषी को आजीवन कारावास
तीसरी घटना वॉल्सॉल की थी, जहाँ एक व्यक्ति ने एक सिख महिला का पीछा करते हुए उसके घर तक पहुँचकर उसके साथ धार्मिक नफरत से प्रेरित गंभीर बलात्कार किया था।
सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की सहायता से अपराधी की पहचान की गई। उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
कुलदीप सिंह ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि जब अपराधियों की शीघ्र पहचान कर ली जाती है, तो उसके क्या परिणाम सामने आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इन तीनों घटनाओं को विशेष रूप से सिखों के विरुद्ध नफरती अपराधों के रूप में दर्ज करने के बजाय नस्लीय या धार्मिक नफरत से प्रेरित अपराधों के रूप में दर्ज किया गया। इससे यह बुनियादी प्रश्न खड़ा होता है कि क्या सरकारी आँकड़े सिखों के साथ हो रही घटनाओं की वास्तविक स्थिति प्रस्तुत करते हैं।
उन्होंने कहा, “सिख समुदाय को सिखों के विरुद्ध नफरत को गंभीरता से लेने के लिए सरकारी संस्थाओं को बाध्य करने के उद्देश्य से अभियान चलाने, इनाम घोषित करने और संसद तक पहुँच बनाने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए। हमें समान सुरक्षा, समान प्राथमिकता और सही आँकड़ों की आवश्यकता है।”
सरकारी आँकड़ों में सिखों के विरुद्ध नफरती अपराधों की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ रही
सिख फेडरेशन (यू.के.) ने ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के नवीनतम आँकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि मार्च 2025 को समाप्त हुए वर्ष के दौरान इंग्लैंड और वेल्स में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए कुल नफरती अपराधों में से 71 प्रतिशत नस्लीय नफरत से संबंधित थे। ऐसे अपराधों की संख्या 82,490 थी, जबकि धार्मिक नफरत से संबंधित 7,164 अपराध दर्ज किए गए।
इसी रिपोर्ट में आँकड़ों से जुड़ी एक बड़ी समस्या भी सामने आई है। नस्लीय या धार्मिक नफरत से प्रेरित अपराधों के केवल 40 प्रतिशत मामलों में ही पुलिस द्वारा पीड़ितों की जातीय पहचान दर्ज की गई थी, जबकि गृह मंत्रालय द्वारा पिछले पाँच वर्षों से अधिक समय से ऐसा करना अनिवार्य किया गया है।
सिख फेडरेशन के अनुसार, यह समस्या इसलिए और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि ब्रिटेन की सरकारी सांख्यिकी सेवा (जी.एस.एस.) की वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत पुलिस बलों के लिए पीड़ितों की सिख और यहूदी जातीय पहचान अलग से दर्ज करना अनिवार्य नहीं है।
फेडरेशन ने कहा कि ब्रिटेन के समानता अधिनियम, 2010 के अंतर्गत दोनों समुदायों को जातीय समूहों के रूप में कानूनी मान्यता प्राप्त है।
सिख फेडरेशन के अनुसार, सरकारी सांख्यिकी सेवा पर इस वर्ष के अंत में जातीय पहचान से संबंधित अपने मानक प्रकाशित करते समय इस भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण को समाप्त करने और वर्तमान गलती को सुधारने के लिए काफी दबाव डाला जा रहा है।
सही आँकड़ों के लिए जनगणना के आँकड़ों का उपयोग करने की माँग
कुलदीप सिंह ने ब्रिटिश सरकार से माँग की कि सभी समुदायों से संबंधित नफरती अपराधों के पीड़ितों की अधिक सटीक स्थिति प्रस्तुत करने के लिए जनगणना के ऐसे व्यक्तिगत आँकड़ों का उपयोग किया जाए, जिनसे लोगों की निजी पहचान हटा दी गई हो।
उन्होंने बताया कि लगभग 11 महीने पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से पुलिस मामलों के मंत्री के सामने भी यह सुझाव रखा गया था।
कुलदीप सिंह ने कहा कि सिख फेडरेशन (यू.के.) का मानना है कि सिखों के विरुद्ध नफरती अपराधों की वास्तविक संख्या सरकारी आँकड़ों में दिखाई गई संख्या से कई गुना अधिक हो सकती है। उनके अनुसार, यह संख्या संभावित रूप से 20 गुना तक भी अधिक हो सकती है।
फेडरेशन ने बताया कि यह अनुमान सिख समुदाय की जनसंख्या, अनेक सिखों की स्पष्ट धार्मिक पहचान और इस तथ्य के आधार पर लगाया गया है कि नस्लीय नफरत से प्रेरित अपराधों के 70 प्रतिशत से अधिक पीड़ित गैर-श्वेत हैं, जबकि कुल जनसंख्या में उनका हिस्सा केवल 15 प्रतिशत है।
कुलदीप सिंह ने कहा कि जब गृह मंत्रालय अक्टूबर के अंत में नफरती अपराधों के बारे में अपने अगले वार्षिक आँकड़े जारी करेगा, तो उसके पास समस्या को छिपाने के बजाय सामने लाने का अवसर होगा।
उन्होंने कहा, “जब गृह मंत्रालय अक्टूबर के अंत में नफरती अपराधों के अगले वार्षिक आँकड़े प्रकाशित करेगा, तो उसके पास समस्या को छिपाने के बजाय उजागर करने का अवसर होगा। जनगणना के ऐसे आँकड़ों का उपयोग किया जाना चाहिए, जिनसे व्यक्तियों की निजी पहचान हटा दी गई हो, ताकि यह सामने आ सके कि वास्तव में किन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। यह संस्थागत नस्लवाद से निपटने और यह सुनिश्चित करने का मामला है कि हर समुदाय की गणना हो।”
कीर स्टार्मर से पिछला वादा पूरा करने की अपील
कुलदीप सिंह ने यह भी याद दिलाया कि कीर स्टार्मर ने विपक्ष में लेबर पार्टी के नेता रहते हुए स्वीकार किया था कि लगातार आई सरकारें सिख समुदाय के साथ न्याय करने में विफल रही हैं।
उनके अनुसार, कीर स्टार्मर ने वादा किया था कि लेबर पार्टी की सरकार सिखों के विरुद्ध नफरती अपराधों को मान्यता देगी और उनसे निपटेगी। इसमें विशेष रूप से सिखों की स्पष्ट धार्मिक पहचान के कारण उन्हें निशाना बनाकर किए जाने वाले हमले शामिल हैं।
सिख फेडरेशन (यू.के.) ने सरकार से माँग की है कि वह अपना यह वादा पूरा करे, पुलिस द्वारा सिखों के विरुद्ध नफरती अपराधों को दर्ज करने की प्रक्रिया में सुधार लाए, पीड़ितों के बारे में अधिक सटीक आँकड़े प्रकाशित करे और यह सुनिश्चित करे कि सिखों के विरुद्ध होने वाले गंभीर नफरती अपराधों को भी अन्य नफरती अपराधों के समान प्राथमिकता दी जाए।

